ब्रसेल्स में विदेश मंत्री जयशंकर की कूटनीतिक पहल, आतंकवाद के खिलाफ भारत को मिला EU का साथ

S Jaishankar

S Jaishankar on terrorism:(ब्रसेल्स): विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी बेल्जियम और लक्जमबर्ग यात्रा के दौरान यूरोपीय संसद के नेताओं और शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर भारत-यूरोपीय संघ (EU) संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संवाद किया। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को मिले समर्थन का भी स्वागत किया।

जयशंकर ने यूरोपीय संसद के वरिष्ठ सदस्यों एंजेलिका नीबलर, उरमास पाएत, पिलर देल कास्तिलो, व्लादिमीर प्रेबिलिक, और विंकलर ग्यूला से सकारात्मक बातचीत की। उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि इन नेताओं ने भारत-ईयू सहयोग को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी दिखाई और आतंकवाद के खिलाफ भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को लेकर सहमति जताई। भारत-ईयू मजबूत साझेदारी के लिए इन नेताओं का समर्थन प्रशंसनीय है। उन्होंने आतंकवाद से लड़ने के भारत के अधिकार को समझा और समर्थन किया

बेल्जियम के प्रधानमंत्री और राजा से भी भेंट

अपने दौरे के दौरान जयशंकर ने बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर और राजा फिलिप से भी मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंध, व्यापार, ऊर्जा, और वैश्विक सुरक्षा सहयोग जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से भी मुलाकात की और 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने तथा आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

पहलगाम आतंकी हमला और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने भारत में व्यापक रोष फैलाया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट प्रतिक्रिया की मांग उठी। जयशंकर ने इस मुद्दे को यूरोपीय नेताओं के सामने प्रमुखता से उठाया और भारत के सख्त रुख को स्पष्ट किया।

भारत-ईयू सहयोग का नया अध्याय

जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूरोपीय संघ हरित ऊर्जा, डिजिटल साझेदारी, व्यापार समझौते और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग को नई दिशा देने के प्रयास में हैं। भारत को यूरोप में एक स्थिर, लोकतांत्रिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है। जयशंकर की ब्रसेल्स यात्रा ने न केवल भारत-ईयू संबंधों को मजबूती दी, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन सुनिश्चित करने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी यह कूटनीतिक पहल भारत की विदेश नीति में संतुलन और प्रभावशीलता दोनों का संकेत देती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *