संतोष कुमार सिंह
चंडीगढ़: हरियाणा में जिस तेजी से सियासी घटनाक्रम हुआ है लगभग 9 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद मनोहर लाल ने त्यागपत्र दिया और उनके स्थान पर नये मुख्यमंत्री के रूप में नायब सिंह सैनी ने शपथ ली, उससे सियासी विश्लेषक भी अचंभे में हैं। बावजूद इसके मनोहर लाल का शाषण काल अपनी उन मनोहारी योजनाओं के लिए याद किया जायेगा जिसकी बदौलत राज्य की अलग छवी बनी और केंद्र सरकार समेत अन्य राज्यों ने भी उन योजनाओं को लागू किया।
विकास के पथ पर बढ़ता हरियाणा…उन्नति और खुशहाली की नई नई कहानियां लिख रहा है और इसकी बुनियाद रखी है मनोहर लाल ने। इन्हीं में से एक योजना है स्वामित्व योजना। जिसको लागू कर देश के तमाम राज्यों के लिए हरियाणा मॉडल बन गया और बाकियों के लिए अनुकरणीय उदाहरण पेश करता दिखा।
क्या है स्वामित्व योजना
दरअसल गांवों के लाल डोरा में आने वाली संपत्ति का मालिकाना हक दिलाने वाली मनोहर लाल की इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत करने का श्रेय हरियाणा को जाता है। इसके सफल कार्यान्यवयन के जरिए जो नजीर हरियाणा से पेश किया उसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना को विगत वर्ष देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया।
आंकड़ों की माने तो हरियाणा में स्वामित्व योजना का लाभ हासिल करने वाले लोगों की अनुमानित संख्या तीन लाख से ज्यादा है। गांवों में लाल डोरे के दायरे में आने वाले लोगों को डीड रजिस्ट्रेशन के जरिये प्रापर्टी की मलकीयत देने के बाद प्रदेश सरकार ने शहरी लोगों को भी इस योजना का लाभ दे रही है। पिछले पांच सालों के भीतर हरियाणा के शहरों की परिधि में सैकड़ों गांव शामिल हुए और फलस्वरूप शहरी निकायों का दायरे का विस्तार भी हुआ। जो गांवों में रहते हैं उनकी प्रापर्टी लाल डोरे में ही रही लेकिन मनोहर सरकार ने ऐसे शहरी लोगों को भी उनकी प्रापर्टी पर मालिकाना हक प्रदान किया, फलस्वरूप स्वामित्व योजना लागू होने से गांवों में कई हजार करोड़ रुपये की प्रापर्टी कानूनी रूप से वैद्य हो गई।
बड़ी बात यह है कि हरियाणा सरकार ने ‘लाल डोरा मुक्त गांव’ योजना की शुरुआत 26 जनवरी 2020 को सीएम सिटी करनाल के गांव सिरसी से की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य हरियाणा के सभी नागरिकों को अपने मकान और दुकान पर मालिकाना हक प्रदान करना है। आगे चलकर केंद्र सरकार नें स्वामित्व योजना के रुप में देशभर में लागू किया। उसके बाद से गांवों को लाल डोरा से मुक्त करने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया गया। इसके तहत गांव के लाल डोरा के अंदर जिन भी लोगों के घर दुकान बने हुए थे। उन्हें राजस्व रिकार्ड में शामिल कर लोगों के नाम उनकी रजिस्ट्री की गई है। ऐसा होने से भविष्य में यदि वो व्यक्ति उस जमीन की खरीद फरोख्त करता है तो तहसील कार्यालय में उसकी रजिस्ट्री होगी।
काबिज व्यक्ति को भी मालिकाना हक देने का प्रावधान
स्वामित्व योजना योजना के तहत 20 वर्ष या इससे अधिक वर्षों से काबिज लोगों को मालिकाना हक दिया गया। काबिज व्यक्ति को मालिकाना हक लेने के लिए कलेक्टर रेट से भी कम अदायगी की व्यवस्था की गई है। मालिकाना हक के लिए कलेक्टर रेट पर अधिकतम 50 प्रतिशत तक छूट देने का प्रावधान किया गया।
ये तो सिर्फ स्वामित्व योजना की बात रही। इसके अलावा भी ऐसी कई योजनाये मनोहर लाल ने शुरू किया जो कि केंद्र सरकार के साथ ही बाकी के राज्यों के लिए नजीर बना। इन योजनाओं में प्रमुख हैं परिवार पहचान पत्र योजना, जल संरक्षण संबंधी योजना, लिंगानुपात सही करने की दिशा में बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ योजना। कई योजनायें है जिनके लिए मनोहर लाल के मनोहारी शाषण को याद किया जायेगा।
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