दुश्मन की भेजी मिसाइल कैसे हवा में हो जाती है खत्म, जानिए क्या होता है एंटी बैलिस्टिक मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम

नई दिल्ली: अक्सर आपने सुना होगा की किसी भी आतंकी संगठन ने इसरायल पर मिसायल दागी लेकिन वो पहुंची नहीं हवा में ही खत्म हो जाती है। आखिर आप जानते हैं कि एंटी बैलिस्टिक मिसाइल से बचने के लिए एंटी बैलिस्टिक मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम क्या होता है। आइये आपको बताते हैं कि क्या होता है एयर डिफेंस सिस्टम।

भारत भी करने वाला है इसका प्रयोग

इजरायली राफेल के स्पाइडर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल भारत भी करता है। ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि 27 फरवरी 2019 को भारत-पाकिस्तान में हुई हवाई मुठभेड़ के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुए एमआई-17 हेलीकॉप्टर पर गलती से इसी डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था।

इजरायली एयर डिफेंस की खूबियां

– रूस के S-400 की तरह इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम को आयरन डोम कहा जाता है। इजरायल का दावा है कि उसका आयरन डोम डिफेंस सिस्टम दुश्मन की 90 फीसद मिसाइलों को हवा में ध्वस्त करने में सक्षम है।

– यह दुनिया की बेहतरीन रक्षा प्रणाली है। इसका निर्माण इजरायली कंपनी राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्री ने संयुक्त रूप से किया है। इसकी एक खास खूबी यह है कि यह किसी भी मौसम में कारगर है और दुश्मन के हमले से बचाव करने की क्षमता रखती है।

– इजरायल का आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम एक बहुउद्देशीय युद्धक हथियार है। इसकी मिसाइलों में लगे इंटरसेप्टर इतने सटीक हैं कि दुश्मन मिसाइल राकेट और ड्रोन की सही स्थिति का अंदाजा लगाकर हवा में ही उसे ध्वस्त कर देता है।

– आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम की सटीकता 90 फीसद है। यह क्रूज मिसाइल, गाइडेड मिसाइलें, ड्रोन और अन्य हवाई हमलों को विफल करने की क्षमता रखता है। दरअसल, यह एक ग्राउंड टू एयर डिफेंस सिस्टम है। यह रडार और इंटरसेप्टर मिसाइलों से लैस है। इसके रडार दुश्मन मिसाइलों को ही नहीं, बल्कि उक्त मिसाइल या राकेट कहां गिरेगी इसकी भी सटीक जानकारी देता है।

– Iron Dome डिफेंस सिस्टम एक साथ दो हजार से ज्यादा टारगेट ध्वस्त करने की क्षमता रखता है। इजरायल अपने नागरिकों की रक्षा के लिए दुनिया के इस बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम का उपयोग करता है। इजरायल ने समुद्री सुरक्षा के लिए इस तरह का नौसेना वर्जन भी तैयार किया है। इसका नाम सी ड्रोम है।

– खास बात यह है कि इजरायल का यह डिफेंस सिस्टम यह पता लगाने में सक्षम है कि दुश्मन की मिसाइल रिहायसी इलाके में गिरेगी या नहीं। इसके साथ उस मिसाइल का भी पता लगा लेती है कि कौन सी मिसाइल अपने निशाने से चुक रही है। यह उन्हीं मिसाइलों पर प्रहार करती है, जो रिहायसी इलाकों में गिरने वाली होती है। उन मिसाइलों को यह डिफेंस सिस्टम हवा में ही मार गिराता है।

यह होता है बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम

भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम का उद्देश्य सभी प्रकार की शत्रुतापूर्ण मिसाइलों, यहां तक कि परमाणु मिसाइलों से भी वायु रक्षा कवच प्रदान करना है। बैलिस्टिक मिसाइल आमतौर पर लम्बी दूरी की मिसाइल होती हैं जो न्यूक्लियर वारहेड को अपने निशाने पर ले जाने में सक्षम होती हैं। ऐसी मिसाइल की मदद से दुश्मन अपने देश में बैठ कर हाइपरसोनिक स्पीड से किसी भी देश पर हमला बोल सकता है।

भारत भी बढ़ा रहा है ताकत

भारत ने अपने डिफेंस को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम की इंटरसेप्टर मिसाइल के दूसरे चरण का पहला सफल परीक्षण किया है। आम तौर पर इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम को टू टियर बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस शील्ड भी कहा जाता है। दुनियाभर में जहां सभी देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइल की भरमार होती जा रही है तो वहीं इनसे निपटने के लिए एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम भारत की एक आवश्यकता बन गया था।

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