संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के ठीक एक दिन बाद संसद का शीताकालीन सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में चुनावी नतीजों का असर संसद सत्र की कार्यवाही पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। यानी शीतकालीन सत्र की शुरुआत 4 दिसंबर से होने जा रही है जिसके 22 दिसंबर तक चलने की संभावना है। लेकिन इससे पहले राज्यसभा सांसदों को कार्यवाही को लेकर निर्देश जारी हुए हैं।
ये निर्देश संसदीय परंपरा की गरिमा को बनाये रखने के लिहाज से तो जरूरी ही कहे जायेंगे लेकिन चुनावी वर्ष में हमारे माननीय इन परंपराओं का कितना निर्वहण करेंगे ये देखा जाना होगा। दरअसल, राज्यसभा सांसदो के लिए जारी इन निर्देशों को अप्रैल 2022 में प्रकाशित हैंडबुक में निर्दिष्ट संसदीय परंपराओं और प्रैक्टिस का हवाला देते हुए दिया गया है। राज्यसभा सांसदों को स्पष्ट किया गया है कि जब तक सभापति नोटिस को स्वीकृति न दें तब तक इसकी जानकारी दूसरे सांसदों के साथ साझा नहीं की जाए।
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क्या है खास खास निर्देश
सदन में थैंक्स, थैंक्यू, जय हिन्द, वंदे मातरम जैसे नारे न लगाए जाएं।
सभापति की ओर से दी गई व्यवस्था की सदन के भीतर या बाहर आलोचना नहीं होनी चाहिए।
सदन में प्ले कार्ड नहीं लहराएं।
आसन को पीठ न दिखाई जाए।
सदस्य सभापति के पास सीधा न पहुंचे, वे सहायक के हाथों पर्ची भेज सकते हैं।
जब सभापति बोल रहे हों तब कोई भी सदस्य सदन न छोड़े
सभापति के बोलते समय सदन में शांति होनी चाहिए
अगर बिना अनुमति के कोई सांसद 60 दिनों तक गैरहाजिर रहता है तो उसकी सीट खाली घोषित की जा सकती है
सदन में सदस्यों की उपस्थिति दर्ज होनी आवश्यक
नए सदस्य का पहला भाषण, मेडन स्पीच, 15 मिनट से अधिक का न हो और विषय से हटकर न बोलें
सदन में एक साथ दो सदस्य खड़े नहीं हो सकते
संसद परिसर में धूम्रपान पर प्रतिबंध है
सदन की कार्यवाही की वीडियोग्राफी नहीं कर सकते सांसद
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शीतकालीन सत्र के शुरू होने से पहले राज्यसभा सांसदों के लिए जारी कड़े निर्देशों में एक अहम बात ये है कि सभापति की मंजूरी से पहले सदन में दिए जाने वाले नोटिस को सार्वजनिक नहीं किया जाए। इसके साथ ही निर्देशों में यह भी कहा गया है कि सांसदों को बेवजह और विवादित विषयों के प्रचार प्रसार से बचना चाहिए। इस बीच देखा जाए तो अभी तक राज्यसभा में विशेष तौर पर विपक्षी सांसद सदन में किसी भी खास मुद्दे को उठाने के नोटिस को सार्वजनिक करते आए हैं लेकिन अब इसे रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
लब्बोलुआब ये है कि संसद को चलाने के लिए दिशानिर्देश तो पहले से ही है बस उसे जारी करके सांसदों से उसके अनुपालन की गुजारिश की गई है। हमारे सांसद कितना अनुपालन करते हैं उसी पर संसद के शीतकालीन सत्र का सुचारू रूप से चलना और चलाया जाना निर्भर करेगा।
गौरतलब है कि संसद का शीतकालीन सत्र के इस बार 4 दिसंबर से शुरू होकर 22 दिसंबर तक चलने की संभावना है। यानी शीतकालीन सत्र के 19 दिनों के दौरान 15 बैठकें होंगी।