नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल शुक्रवार को दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित नेशनल अर्बन एंड रियल एस्टेट डेवलपमेंट कॉन्क्लेव 2026 में शामिल हुए। दो दिवसीय NAREDCO डेवलपमेंट कॉन्क्लेव के अंतिम दिन उन्होंने शहरीकरण की चुनौतियों, रियल एस्टेट क्षेत्र में सुधार, किफायती आवास और बुनियादी ढांचे के विस्तार को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए संतुलित, पारदर्शी और जन-केंद्रित विकास मॉडल अपनाना आवश्यक है। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री से मिले मार्गदर्शन ने उन्हें प्रशासन चलाने की दिशा दी। उन्होंने कहा कि अधिकारी, जनता, विपक्ष और मीडिया के सवाल ही सरकार को दिशा प्रदान करते हैं।
रेरा से बढ़ी पारदर्शिता
उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र में रेरा लागू होने के बाद पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। ‘प्री रेरा’ और ‘पोस्ट रेरा’ के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया गया।
अफोर्डेबल हाउसिंग पर फोकस
मनोहर लाल ने कहा कि भूमि लागत बढ़ने से किफायती आवास क्षेत्र में चुनौतियां आई हैं। उन्होंने दो स्तरीय फार्मूले के तहत कीमत तय करने और परियोजना-आधारित लागत निर्धारण का सुझाव दिया। छोटे ऋणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
TOD और शहरी योजना
मंत्री ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) परियोजनाओं को बढ़ावा देने, मेट्रो के आसपास भूमि उपलब्ध कराने और हाउसिंग एक्सचेंज जैसे मॉडल पर विचार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में 6 से 7 करोड़ नए शहरी मकानों की आवश्यकता होगी और पांच यूनिवर्सिटी टाउन विकसित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।
झुग्गी-झोपड़ी और औद्योगिक आवास
मनोहर लाल ने कहा कि झुग्गी-झोपड़ी, औद्योगिक आवास और शहरी रिडेवलपमेंट की चुनौतियों पर ध्यान देना जरूरी है। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए गारंटी फंड, रेंटल हाउसिंग पोर्टल और स्टांप ड्यूटी में धोखाधड़ी रोकने के उपायों पर सरकार काम कर रही है। मंत्री ने कहा कि चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए एक मजबूत, टिकाऊ और समावेशी शहरी विकास का निर्माण किया जाएगा।