ईरान में भयावह हुई विरोध और हिंसा की आग, अब तक 2500 मौतें

Iran Violence: ईरान में विरोध प्रदर्शन तेजी से बढ़ रहे हैं, जो दिसंबर 2025 के अंत में आर्थिक संकट और महंगाई के खिलाफ शुरू हुए थे। अब ये प्रदर्शन पूरे देश में फैल चुके हैं, जहां लोग सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं और सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा बलों द्वारा की गई क्रूर दमन कार्रवाई में मौतों की संख्या बहुत अधिक हो गई है।

अब तक 2500 मौतें

कुछ रिपोर्ट्स में 2,000 से 2,400 तक प्रदर्शनकारियों की मौत बताई गई है, जबकि ईरान इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं ने 8-9 जनवरी की दो रातों में ही 12,000 से ज्यादा मौतों का अनुमान लगाया है। इंटरनेट ब्लैकआउट और संचार प्रतिबंध के कारण सटीक आंकड़े बाहर आना मुश्किल है, लेकिन अस्पतालों में घायलों की भारी भीड़ और मॉर्ग में शवों के ढेर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

ट्रंप ने किया प्रदर्शनकारियों का खुलकर समर्थन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, “ईरानी पैट्रियट्स, प्रदर्शन जारी रखो-अपनी संस्थाओं पर कब्जा करो!!! हत्यारों और दुरुपयोग करने वालों के नाम बचाकर रखो, वे भारी कीमत चुकाएंगे। मदद रास्ते में है।” ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी मीटिंग्स रद्द कर दीं और कहा कि “बेतुकी हत्याएं” रुकने तक कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को प्रोत्साहित किया कि मदद विभिन्न रूपों में आएगी, हालांकि उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि यह सैन्य मदद है या अन्य।

ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ

ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर तत्काल 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे चीन, भारत, तुर्की, यूएई जैसे देश प्रभावित हो सकते हैं।

ईरान ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। ईरान के नेशनल सिक्योरिटी चीफ (अली लरिजानी) ने ट्रंप और इजरायली पीएम नेतन्याहू को “हत्यारा” कहा। ईरानी विदेश मंत्री और अन्य अधिकारियों ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “अमेरिका को खुश करने वाले वांडल” बताया और दावा किया कि सुरक्षा बल स्थिति नियंत्रण में है। ईरान ने अमेरिका पर हमले की धमकी दी है कि यदि कोई सैन्य कार्रवाई हुई तो क्षेत्रीय अमेरिकी और इजरायली ठिकाने निशाने पर होंगे।

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