नई दिल्ली। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे। वे चीन के विदेश मंत्री और अपने समकक्ष वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) स्तर की 25वें दौर की वार्ता में शामिल होंगे। यह वार्ता मंगलवार को होने वाली है।
दोनों नेता सीमा वार्ता तंत्र के लिए नामित विशेष प्रतिनिधि हैं। यह तंत्र 2003 में स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा विवाद का व्यापक समाधान तलाशना है। हालांकि इस तंत्र से अभी तक सीमा विवाद का पूर्ण समाधान नहीं निकल पाया है, लेकिन दोनों पक्ष इसे तनाव कम करने और मतभेदों को संभालने का उपयोगी माध्यम मानते हैं।
दिल्ली में ब्रिक्स समिट से पहले दौरा क्यों है खास?
यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हो रही है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। दोनों पक्षों के अधिकारी आशावादी हैं कि शी की भागीदारी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का अवसर मिल सकता है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहल पर चर्चा हो सके।
अजित डोभाल और वांग यी की पिछली मुलाकात अगस्त 2025 में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में दोहराया था कि सीमा पर शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों के लिए जरूरी है। विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि सीमा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे सबसे गंभीर हैं और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।