Rajnath Singh (नई दिल्ली): रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान से चल रहे भारी तनाव के बीच बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोमवार को कहा कि वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में “शांति का समय” केवल एक भ्रम है, और भारत को अपेक्षाकृत शांत अवधियों के दौरान भी पूरी तरह से तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा प्रदर्शित पराक्रम की सराहना करते हुए की।
सेना की क्षमता को सराहा
दिल्ली में आयोजित रक्षा लेखा विभाग (DAD) के नियंत्रकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारतीय सेना की तैयारियां और स्वदेशी रक्षा उपकरणों का प्रदर्शन अब वैश्विक मान्यता प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कहा “विश्व अब भारत के रक्षा क्षेत्र को नए सम्मान की दृष्टि से देख रहा है। जो उपकरण पहले आयात किए जाते थे, वे अब देश में ही निर्मित हो रहे हैं।”
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में बने रक्षा उपकरणों की मांग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने और रक्षा लेखा विभाग को “नियंत्रक से सुविधा प्रदाता” बनने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
अर्थव्यवस्था का हिस्सा बना रक्षा क्षेत्र
रक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अब रक्षा व्यय को मात्र खर्च नहीं बल्कि आर्थिक निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा “आज रक्षा बजट को विकास का वाहक माना जा रहा है। रक्षा अर्थशास्त्र को रणनीतिक योजना और आकलन का हिस्सा बनाना समय की मांग है।”
वैश्विक सैन्य व्यय में रिकॉर्ड वृद्धि
राजनाथ सिंह ने स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि 2024 में वैश्विक सैन्य खर्च 2.7 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो भारत के स्वदेशी रक्षा उद्योगों के लिए अपार अवसर लेकर आता है।
नवाचार और आत्मावलोकन की आवश्यकता
उन्होंने रक्षा विभाग से आग्रह किया कि वह केवल बाहरी ऑडिट पर निर्भर रहने की बजाय आंतरिक आत्मावलोकन और सुधार के जरिए कार्य संस्कृति को अधिक चुस्त और उत्तरदायी बनाए। उन्होंने रक्षा विभाग के नए आदर्श वाक्य सतर्क, सक्रिय, अनुकूल की भी सराहना की, जिसे उन्होंने तेजी से बदलते रक्षा परिवेश की अनिवार्य कार्य संस्कृति बताया। अंत में, रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए, चाहे वह वित्तीय प्रणाली हो या सैन्य तैयारियां, क्योंकि “शांति का समय भी युद्ध जैसी तैयारी की मांग करता है।”