संतोष कुमार सिंह
जींद: मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार का हर फैसला जनहितैषी होता है और उसका असर दूरगामी होता है। एक ऐसा ही फैसला हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने लिया है जिसने 54 साल के बोर्ड के इतिहास को बदल दिया। इस ऐतिहासिक फैसले की बदौलत अब छात्र अपने घर से बोर्ड की परीक्षा दे सकेगा।
यह फैसला शहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के दिव्यांग छात्र की मेहनत और लगन देखते हुए बोर्ड ने लिया। अपना 54 वर्षों का इतिहास बदल दिया। यह पहली बार हुआ है जब कोई छात्र बोर्ड परीक्षा घर से देगा और साथ ही छात्र के लिए घर पर ही पर्यवेक्षक तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही छात्र को लेखन राइटर भी दिया जाएगा।
कौन है वो दिव्यांग छात्र जिसके लिए बदला इतिहास
इस बच्चे का नाम आर्यांश है जो राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का छात्र है। इस दिव्यांग की चुनौतियों को देखते हुए उस विद्यालय प्राचार्य राजेंद्र आजाद दृष्टि बाधित हैं और वह भिवानी स्थित बोर्ड कार्यालय जाकर चेयरमैन से मिले। उन्होंने छात्र आर्यांश की स्थिति से चेयरमैन को अवगत कराया। इसके बाद बोर्ड ने छात्र को घर से परीक्षा देने की अनुमति दी। राजेंद्र ने बताया कि आर्यांश होनहार छात्र है।
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क्या है आर्यांश की परेशानी
दरअसल आर्यांश को मस्कुलर डिस्ट्राफी है जिसकी वजह से वह चल फिर नहीं सकता। इस बाबत बोर्ड के चेयरमैन डॉ. वीपी यादव का कहना है कि इसी कारण एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने घर पर ही परीक्षा केंद्र के समान सभी व्यवस्थाएं की हैं। उसे लेखक भी दिया गया। बोर्ड कर्मचारी ही घर पर प्रश्नपत्र लेकर जाएगा। उत्तर पुस्तिका भी वही लेकर आएगा। आब्जर्वर भी नियुक्त किया गया है, जिसकी निगरानी में परीक्षा होंगी।
क्या है मस्कुलर डिस्ट्राफी की पहचान
उल्लेखनीय है कि मस्कुलर डिस्ट्राफी एक आनुवांशिक बीमारी है। यह मांसपेशियों को कमजोर कर देती है। जिसकी वजह से मांसपेशियों की बीमारी से संबंधित अन्य लक्षणों का कारण बनती है। चलने-फिरने की क्षमता को प्रभावित कर बहुत कम कर देती है। यह उन मासपेशियों को भी प्रभावित कर सकती है जो आपके हृदय और फेफड़ों को कार्य करने में मदद करती हैं।
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