Himachal Congress Crisis: हिमाचल प्रदेश में इस समय सियासी भूचाल मचा है। कांग्रेस विधायकों की नाराजगी के बाद सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस्तीफा की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है। सुबह कैबिनेट मंत्री और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य ने खुली बगावत कर दी थी। मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और सुक्खु सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
हिमाचल में इस समय सियासी तापमान का पारा इतना हाई है कि कांग्रेस ने हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा और कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा है। कांग्रेस लगातार डैमेज कंट्रोल करने में लगी है। अब सुगबुगाबहट सुनाई दे रही कि सीएम सुक्खू ने पर्यवेक्षकों के सामने इस्तीफे की पेशकश कर दी है।
अभी तक पार्टी आलाकमान की ओर से इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आलाकमान का स्पष्ट निर्देश हैं कि हर कीमत पर हिमाचल में सरकार बचनी चाहिए। लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए मुश्किल लग रहा है। कांग्रेस विधायकों ने सुक्खू सरकार पर अपमानित और उपेक्षित होने का आरोप लगाया है।
राज्यपाल से मिलने का मांगा समय
इससे पहले सदन में बीजेपी विधायकों ने सुक्खू सरकार को जमकर घेरा था। सदन में हंगामा करने के बाद स्पीकर ने 15 बीजेपी विधायकों को सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद निष्कासित बीजेपी विधायक सदन में ही धरने पर बैठ गए। जिसके बाद मार्शल को बुलाकर बीजेपी विधायकों को बाहर जाने को कहा गया। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस दौरान पूर्व सीएम जयराम ठाकुर के साथ धक्का-मुक्की भी हुई है।
इसके बाद बीजेपी विधायकों ने राजभवन में राज्यपाल से मिलने का समय मांगा। बता दें, हिमाचल में पहले मंगलवार को क्रॉस वोटिंग हुई और बुधवार सुबह से कांग्रेस के अंदर भूचाल मचा है। प्रदेश में इस समय कांग्रेस दो धड़ों में बटी हुई है। मंगलवार को कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर बीजेपी के पक्ष में मतदान किया। आज इस सियासी उठापटक के बीच पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि इसको लेकर मैंने प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को इस बारे में बता दिया है।
इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कभी-कभी कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं और वर्तमान हालात को देखते हुए मैं इस सरकार में नहीं रह सकता हूं। विक्रमादित्य की नाराजगी इस समय सुखविंदर सिंह सुक्खू की कार्यशैली को लेकर बताई जा रही है। बीते दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि हिमाचल में कांग्रेस टूट सकती है।
विक्रमादित्य की खुली बगावत
विक्रमादित्य सिंह ने आगे कहा कि हमने हमेशा कांग्रेस आलाकमान का सम्मान किया है और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का सम्मान किया है, लेकिन विधायकों की शिकायत का समाधान नहीं हुआ, ये विधायकों की अनदेखी का ही नतीजा है कि हम राज्यसभा चुनाव हारे हैं। उन्होंने कहा कि मेरी निष्ठा पार्टी के साथ है, इसलिए खुलकर बोल रहा हूं।
हालांकि, विक्रमादित्य ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है अभी तक पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया। अब गेंद कांग्रेस आलाकमान के पाले में है। अगर विक्रमादित्य अपने समर्थकों के साथ बीजेपी का दामन थाम लेते हैं और निर्दलीय विधायकों का साथ बीजेपी को मिल गया तो सुक्खू सरकार पर संकट के बादल छा जाएंगे।
विक्रमादित्य की खुली बगावत के बाद कांग्रेस आलाकमान किस तरह से इस संकट को संभालने की कोशिश करेगी यह देखने वाली बात होगी। बता दें कि, इस समय हिमाचल कांग्रेस दो धड़ों में टूटी हुई है। एक धड़ा सुक्खू समर्थकों का है और दूसरा धड़ा ऐसे नेताओं और मंत्रियों का है, जो सुक्ख सरकार की कार्यशैली से नाराज है।