Himachal Congress Crisis: हिमाचल कांग्रेस में इस समय भूचाल आया हुआ है। पहले मंगलवार को क्रॉस वोटिंग हुई और कांग्रेस राज्यसभा प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी को हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी प्रत्याशी हर्ष महाजन की जीत हुई। इसके बाद कांग्रेस जिस संकट का सामना काफी सालों से कर रही है एक फिर वह हिमाचल में शुरू हो गया।
प्रदेश में इस समय कांग्रेस दो धड़ों में बटी हुई है। मंगलवार को कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर बीजेपी के पक्ष में मतदान किया। आज इस सियासी उठापटक के बीच पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि इसको लेकर मैंने प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को इस बारे में बता दिया है।
इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कभी-कभी कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं और वर्तमान हालात को देखते हुए मैं इस सरकार में नहीं रह सकता हूं। विक्रमादित्य की नाराजगी इस समय सुखविंदर सिंह सुक्खू की कार्यशैली को लेकर बताई जा रही है। बीते दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि हिमाचल में कांग्रेस टूट सकती है।
विक्रमादित्य की खुली बगावत
विक्रमादित्य सिंह ने आगे कहा कि हमने हमेशा कांग्रेस आलाकमान का सम्मान किया है और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का सम्मान किया है, लेकिन विधायकों की शिकायत का समाधान नहीं हुआ, ये विधायकों की अनदेखी का ही नतीजा है कि हम राज्यसभा चुनाव हारे हैं। उन्होंने कहा कि मेरी निष्ठा पार्टी के साथ है, इसलिए खुलकर बोल रहा हूं।
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हालांकि, विक्रमादित्य ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है अभी तक पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया। अब गेंद कांग्रेस आलाकमान के पाले में है। अगर विक्रमादित्य अपने समर्थकों के साथ बीजेपी का दामन थाम लेते हैं और निर्दलीय विधायकों का साथ बीजेपी को मिल गया तो सुक्खू सरकार पर संकट के बादल छा जाएंगे।
विक्रमादित्य की खुली बगावत के बाद कांग्रेस आलाकमान किस तरह से इस संकट को संभालने की कोशिश करेगी यह देखने वाली बात होगी। बता दें कि, इस समय हिमाचल कांग्रेस दो धड़ों में टूटी हुई है। एक धड़ा सुक्खू समर्थकों का है और दूसरा धड़ा ऐसे नेताओं और मंत्रियों का है, जो सुक्ख सरकार की कार्यशैली से नाराज है।