Maharashtra Congress: बिहार की सियासी उठापटक के बीच अब महाराष्ट्र में सियासी खेला हुआ है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सीएम अशोक चव्हाण ने कांग्रेस पार्टी का दामन छोड़ दिया। इसके अलावा विधायक पद से भी इस्तीफा स्पीकर को सौंप दिया है। चव्हाण ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले को भेजे अपने पत्र में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया।
बिहार के बाद महाराष्ट्र में शुरू हुए सियासी खेला में कयास लगाए जा रहे हैं कि अशोक चव्हाण बीजेपी में शामिल हो सकते हैं और बीजेपी से वह राज्यसभा भेजे जा सकते हैं। इसके अलावा अशोक चव्हाण के करीब 10 से 12 विधायक कांग्रेस को झटका दे सकते हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय घटित हुआ जब कांग्रेस को सीनियर नेता बाबा सिद्दीकी और मिलिंद देवड़ा कुछ समय पहले कांग्रेस को छोड़ चुके हैं।
अभी औऱ होगा खेला- फडणवीस
इस सियासी उठापटक को लेकर प्रदेश के डिप्टी सीएम और बीजेपी के दिग्गज नेता देवेन्द्र फडणवीस ने कहा, ‘मैंने मीडिया से अशोक चव्हाण के बारे में सुना। लेकिन मैं अभी केवल यही कह सकता हूं कि कांग्रेस के कई अच्छे नेता बीजेपी के संपर्क में हैं। वह नेता जनता से जुड़े हैं वे कांग्रेस में घुटन महसूस कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि कुछ बड़े चेहरे बीजेपी में शामिल होंगे। आगे-आगे देखिये होता है क्या।
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कौन है अशोक चव्हाण
अशोक चव्हाण महाराष्ट्र में कांग्रेस का ऐसा चेहरा माने जाते हैं जो हर मुश्किल में पार्टी के साथ खड़े रहे। साल 2014 में मोदी लहर होने के बाद उन्होंने कांग्रेस को नांदेड सीट निकालकर दी और कांग्रेस को जीत दिलाई। वह महाराष्ट्र के सीएम भी रह चुके हैं। अशोक चव्हाण मूलतः औरंगाबाद जिले की पैठण तहसील के रहने वाले हैं। लेकिन उनके पूर्वज नांदेड़ में आकर बसे और तब से वो नांदेडकर कहलाने लगे।
बता दें कि, अशोक चव्हाण को राजनीतिक विरासत पिता शंकरराव चव्हाण से मिली जो दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे हैं। शंकरराव चव्हाण की ही बदौलत मराठवाड़ा में कांग्रेस मजबूत हुई और सत्ता विरोधी लहर होने के बावजूद कांग्रेस को कोई यहां से हिला नहीं पाया। अशोक चव्हाण 8 दिसंबर 2008 से 9 नवंबर 2010 तक डेढ़ साल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे।
अशोक चव्हाण का नाम आदर्श इमारत घोटाले में आने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा। उस वक्त राजनीतिक जानकारों का कहना था कि मुख्यमंत्री पद जाने के बाद अशोक चव्हाण का राजनीतिक वनवास शुरू हो गया, लेकिन उन्होंने वापसी की और साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की। इसके बाद अशोक चव्हाण को महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी बनाए गए।