Aditya L-1 Mission: शनिवार को एक बार फिर भारत ने अतंरिक्ष में इतिहास रच दिया है। भारत का सूर्य मिशन आदित्य एल-1 अपने लक्ष्य तक पहुंच चुका है। इस उपलब्धि पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसरो को बधाई दी है। पीएम मोदी ने कहा कि यह हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का परिणाम है। भारत की पहली सौर वेधशाला अपने आदित्य एल-1 अपने लक्ष्य तक पहुंच चुकी है।
आगे पीएम मोदी ने कहा कि यह नए भारत की झलक है। मैं वैज्ञानिकों की कामयाबी पर पूरे राष्ट्र के साथ शामिल हूं। हम देश दुनिया और मानवता के कल्याण के लिए विज्ञान को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे। इसरो के अथक प्रयास और समर्पण से हम अंतरिक्ष में नए-नए इतिहास गढ़ने में कामयाब हो रहे हैं। आज पूरा राष्ट्र गर्व की अनुभूति महसूस कर रहा है।
सूर्य के रहस्यों से उठेगा पर्दा
इसरो की इस कामयाबी पर केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने बधाई दी है। उन्होंने कहा कि हम चंद्रमा से लेकर सूर्य तक पहुंचे हैं। पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के लिए जैसा साल 2023 शानदार रहा था ठीक वैसा ही साल 2024 साबित हो रहा है। इसरो की हमारी टीम ने एक और सफलता की कहानी लिखी है। आदित्य एल-1 सूर्य के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए अपनी अंतिम कक्षा में पहुंच गया है।
NASA के सैटेलाइट्स समूह में हुआ शामिल
बता दें कि, आदित्य की यात्रा 2 सितंबर 2023 को शुरू हुई थी। पांच महीने बाद 6 जनवरी 2024 की शाम ये सैटेलाइट L-1 प्वाइंट पर पहुंच गया। इस प्वाइंट के चारों तरफ मौजूद सोलर हैलो ऑर्बिट में तैनात हो चुका है। हैलो ऑर्बिट में डालने के लिए Aditya L-1 सैटेलाइट के थ्रस्टर्स को थोड़ी देर के लिए ऑन किया गया। इसमें कुल मिलाकर 12 थ्रस्टर्स हैं।
अब आदित्य सूरज की स्टडी कर रहे NASA के चार अन्य सैटेलाइट्स के समूह में शामिल हो चुका है। ये सैटेलाइट्स हैं- WIND, Advanced Composition Explorer (ACE), Deep Space Climate Observatory (DSCOVER) और नासा-ESA का ज्वाइंट मिशन सोहो यानी सोलर एंड हेलियोस्फेयरिक ऑब्जरवेटरी है।