Himachal Pradesh: प्रकृति ने ली करीब 200 लोगों की जान, सैकड़ों हुए बेघर, इन राज्यों में बारिश का अलर्ट

शिमला: एक तरफ जहां बिहार में सुखा पड़ने के कारण किसानों के चेहरे पर चिंता कायम है। वहीं दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश में मॉनसून के दौरान भारी बारिश के कारण बड़ा कहर देखने को मिला है। दरअसल, मॉनसून सक्रिय होने के बाद से ही प्रदेश में बारिश का कहर जारी रहा। ऐसे में स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की रिपोर्ट से ये खुलासा हुआ है कि इस दौरान करीब 200 मौत और कई लोग लापता हो गए। इसी के साथ राज्य को भारी आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ा है।

प्रकृति के कहर में अब तक करीब 200 लोगों की मौत

स्टेट मैनेजमेंट अथॉरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 41 दिनों के दौरान कई बार भस्खलन हुआ, कई बार बादल फटे जिसके कारण करीब 200 लोगों की मौत हो गई। वहीं 31 लोग अभी भी लापता है जिनका पता नहीं चल पाया है। बताया जा रहा है कि मरने वाले 200 लोगों में 57 मौतें भूस्खलन और बाढ़ के कारण हुईं, जबकि 142 मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुईं है। स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेट्री के मुताबिक जैसे-जैसे राज्य बारिश और बाढ़ से उबर रहा है, मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है।

राज्य को करीब 8 हजार करोड़ का नुकसान

आंकड़ों के अनुसार, प्रकृति द्वारा बरसाई गई कहर में राज्य को करीब 8000 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। जिसको लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि पिछले 75 सालों में राज्य में आई ये सबसे बड़ी तबाही है। दरअसल, राज्य में लगभग 300 बंद सड़कें हैं। 42 जल आपूर्ति योजनाएं और 274 विद्युत आपूर्ति योजनाएं अभी भी बाधित हैं जिसका सर्वे लगातार जारी है। ऐसे में अनुमान जताया जा रहा है कि और अधिक नुकसान हो सकता है। इसी के साथ इस कहर में कई लोगों की जिंदगी सड़क पर आ गई है।

देश के इन राज्यों में बारिश की संभावना

अथॉरिटी के डेटा के अनुसार 774 घर ढह गए हैं, वहीं 7317 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। 254 दुकानें और 2337 गौशालाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इस बीच मौसम विभाग ने एक बार फिर देश के कई राज्यों में बारिश की चेतावनी दी है। IMDके मुताबिक,हिमाचल प्रदेश के अलावा सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों, उत्तराखंड और उत्तर पूर्वी राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

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