शुभम रावत-
वाराणसी: ज्ञानवापी केस पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत से मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की याचिका को खारिज कर दिया है।
मस्जिद कमेटी ने किया था SC का रुख
अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने गुरुवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख किया था। मुस्लिम संस्था के एक वकील ने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई की मांगकरते हुए पीठ से एएसआई को सर्वे करने से रोकने की अपील की थी।
HC के आदेश में दखल देने की जरूरत नहीं-SC
डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाई कोर्ट ने जिला जज के आदेश को मंजूरी दी है। हम भी हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने की जरूरत नहीं समझते है। उन्होंने कहा कि खुदाई को लेकर चिंता जताई गई है, लेकिन ASI कह चुका है कि खुदाई या ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाली कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी। हम भी ऐसा निर्देश देते हैं।
HC ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को किया खारिज
वाराणसी जिला जज नेज्ञानवापी मस्जिद मेंASI सर्वे करने का आदेश दिया था। जिसके बाद 21 जुलाई को ASI सर्वे शुरू किया गया था। एसआईको 4 अगस्त तक सर्वे ज्ञानवापी मस्जिद की रिपोर्ट वाराणसी की जिला अदालत को सौंपनी थी।एसआई सर्वे को रोकने के लिए मुस्लिमपक्ष ने पहले सुप्रीम कोर्ट फिर हाईकोर्ट में ASI सर्वे के फैसले को चुनौती दी थी। इस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया था।
HC के फैसेले को मुस्लिम पक्ष ने दी थीSC में चुनौती
अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिसके बाद आज इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ नेASI सर्वे को हरी झंडी दिखा दी है।
हिंदू-मुस्लिम पक्ष का ये है दावा
ज्ञानवापी पर हिंदू और मुस्लिम पक्ष का अपना अलग-अलग दावा है। एक ओर जहां हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है किऔरंगजेब ने 1669 में मंदिर को ध्वस्त कराके उसके ढांचे को बदल दिया।वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी परिसर में 600 वर्षों से नमाज अदा की जा रही है। दोनों पक्ष ज्ञानवापी पर कानूनी तौर पर अपना अधिकार पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। मामला वाराणसी जिला कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।354 सालों से चले आ रहे इस विवाद का क्या हल निकलता है यह तो आने वाले समय बताएगा।