नयी दिल्ली: दिल्ली भ्रमण करने आये हर आगंतुक की तमन्ना होती है लोकतंत्र की मंदिर का भ्रमण करें। लोकतंत्र का मंदिर या संसद भवन। अब जब व्यक्ति संसद भवन जाता है तो स्वाभाविक है कि निगाह राष्ट्रपति भवन की ओर भी जाये क्योंकि इस राष्ट्र की राष्ट्राध्यक्ष तो राष्ट्रपति ही है और संसदीय राजनीतिक प्रणाली की अगुआ भी। लेकिन राष्ट्रपति भवन को सिर्फ बाहर निहारना और अंदर जाकर उसे पूरी तन्मयता से निहारने की तमन्ना हर आगंतुक, हर देशी विदेशी नागरिक की होती है। और ये अपेक्षा उस वक्त बढ़ जाती है जब देश के दूर दराज के किसी गांव से आने वाली महिला खुद देश की राष्ट्रपति भवन में रह रही हों, भारतीय लोकतंत्र की शोभा बढ़ा रही हों।
स्वाभाविक है हमारी प्रथम नागरिक यानी द्रौपदी मुर्मू इस भावना को महसूस करती होंगी। यही कारण है कि उन्होंने आम लोगों के लिए राष्ट्रपति भवन खोलकर आम और ख़ास के बीच फर्क को मिटाने का एक अतुलनीय प्रयास किया है। अब तक की जो परंपरा रही है उसके मुताबिक सिर्फ फरवरी माह में आम जनता के लिए राष्ट्रपति भवन में बना मुगल गार्डन खोला जाता था लेकिन अब आप राष्ट्रपति भवन की भी सैर कर सकते हैं।
दरअसल, 1 दिसंबर 2022 से राष्ट्रपति भवन को आम जनता के लिए खोल दिया गया है जिसे हफ्ते के 5 दिन बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को विजिट किया जा सकता है। राष्ट्रपति भवन विजिट के लिए समय भी निर्धारित किया गया है जो कि सुबह 10 बजे से लेकर शाम के 4 बजे तक की है। बताते चले कि यहां विजिट के लिए एक-एक घंटे के पांच टाइम स्लॉट निर्धारित किये गये हैं। इसके लिए आपको बुकिंग करानी होगी। यहां सुबह 8 बजे से 9 बजे तक राष्ट्रपति भवन के हॉल में चेंज ऑफ गार्ड समारोह देखने का मौका भी मिलेगा। भवन में एंट्री के लिए आपको ऑनलाइन टिकट बुक करानी होगी जिसके लिए आप राष्ट्रपति भवन की ऑफिशियल वेबसाइट http://rashtrapatisachivalaya.gov.in/rbtour/ पर जा सकते हैं।
साथ ही में बात करे मुगल गार्डन की तो यह राष्ट्रपति भवन के पीछे की तरफ स्थित है। यह फरवरी के 5 या 6 तारीख को एक महीने के लिए खोला जाता है और मार्च में पुन: इसे बंद कर दिया जाता है। इस दौरान गार्डन की खूबसूरती देखने के लिए देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोगों का तांता लगा रहता है। खुलता है आमतौर पर सैलानियों और आम जनता के लिए प्रवेश व निकासी की व्यवस्था राष्ट्रपति भवन के गेट नंबर 35 से होती है। यह गार्डन करीब 13 एकड़ एरिया में फैला हुआ है। मुगल और ब्रिटिश स्थापत्य कला का मोहक नमूना है मुगल गार्डन।
किसने बनवाया था मुगल गार्डन?
भारत की स्वतंत्रता से पहले राष्ट्रपति भवन का नाम वायसराय हाउस हुआ करता था। जब 1911 में अंग्रेजों ने यह तय किया कि अब भारत की राजधानी कोलकाता की जगह दिल्ली होगी, उस समय वायसराय हाउस को नए तरीके से डिज़ाइन करने के लिए महान वास्तुकार, एड्विन लैंडसियर लूटियंस को इंग्लैंड से भारत बुलाया गया। ताकि वह प्रशासनिक कार्यों के लिए जरूरी इमारतों को डिजाइन करें। लुटियंस मुगल कला से प्रभावित था और उसी कला को ध्यान में रखते हुए उसने इस गार्डन को डिजाइन किया। इसीलिए इस गार्डन का नाम मुगल गार्डन रखा गया।
अंदर मिलती हैं ये सुविधाएं
जरूरत की चीजों जैसे पानी की बोतल और खाने के सामान की चिंता न करें। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर इन्हें अंदर ले जाने पर प्रतिबंध है। आपको यह सब चीजें अंदर ही मिल जाएंगी। अपनी पसंद के हिसाब से आप चीजें खरीदकर खा सकते हैं। या अपनी पसंद की ड्रिंक्स ले सकते हैं। आपको मुगल गार्डन के अंदर पीने का पानी, ड्रिंक्स, शौचालय, प्राथमिक उपचार और बच्चों के लिए आराम की जगह मिल जाएगी।
क्या है मुगल गार्डन में खास?
देश में गार्डन और इको पार्क तो बहुत हैं लेकिन मुगल गार्डन में देखने लायक है मुगल कालीन विरासत और कला। साथ ही करीब 13 एकड़ में फैला यह पार्क 175 मीटर चौड़ा है। जो चार भागों में बांटा गया है – चतुर्भुजकार उद्यान, लंबा उद्यान, पर्दा उद्यान और वृत्ताकार उद्यान। यहां करीब 3000 से ज्यादा फूलों के पौधे हैं। जिनमें करीब 135 प्रकार के सिर्फ गुलाब हैं। यहां 33 जड़ी बूटी के पौधे और 300 तरह की बोनसाई देखने को मिलती हैं।