पटना: जिलाधिकारी जी कृष्णैया हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के बाद सजा काट रहे अन्य बाहुबलियों की रिहाई को लेकर मांग तेज हो गई है। जेल नियमों में बदलाव के बाद अब पूर्व सांसद, प्रभुनाथ सिंह और पूर्व विधायक अनंत सिंह को रिहा करने की मांग की जा रही है जिसको लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बेचैनी बढ़ती हुई नजर आ रही है।
दरअसल, कारा अधिनियम में बदलाव करने के बादडॉन से राजनेता बने आनंद मोहन की रिहाई को लेकर पहले से ही नीतीश सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच प्रभुनाथ सिंह और अनंत सिंह की रिहाई की मांग ने सरकार को परेशानी में डाल दिया है। आनंद मोहन के मामले का हवाला देते हुए पटना में प्रभुनाथ और अनंत की जल्द रिहाई की मांग करते हुए कई पोस्टर लगाए गए हैं। उनके समर्थकों ने उन्हें मुक्त करने के लिए अभियान शुरू किया है।
बता दें कि मोकामा से पांच बार के विधायक अनंत को अगस्त 2019 में छापे के दौरान उनके आवास से एक एके -47 राइफल और अन्य हथियार जब्त किए जाने के बाद आर्म्स एक्ट मामले में 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वहीं, प्रभुनाथ सिंह को 1995 में पटना में तत्कालीन विधायक अशोक सिंह की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। उन्हें 2017 में हजारीबाग की एक अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
गौरतलब है कि बिहार सरकार द्वारा कारा हस्तक 2012 के नियम 481 आई में संशोधन के बाद आनंद मोहन समेत 27 कैदियों की रिहाई हुई थी। सरकार ने बीते 10 अप्रैल को ही बदलाव की अधिसूचना जारी कर दी थी जिसमें कहा गया है कि 14 साल या 20 साल जेल की सजा काट चुके 27 कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया गया है। बता दें कि बिहार सरकार ने कारा हस्तक 2012 के नियम 481 आई में संशोधन किया है।