गुरुग्राम में ‘टावर ऑफ जस्टिस’ का हुआ उद्घाटन, CM सैनी बोले- आधुनिक न्याय व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

गुरुग्राम: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को गुरुग्राम में आधुनिक न्यायिक व्यवस्था के प्रतीक ‘टावर ऑफ जस्टिस’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल सहित कई न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। उद्घाटन के साथ ही यह अत्याधुनिक परिसर राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि गुरुग्राम आज ज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे शहर में आधुनिक न्यायिक सुविधाओं से लैस ‘टावर ऑफ जस्टिस’ का निर्माण न्याय व्यवस्था को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि आधुनिक न्याय का तीर्थ है, जहां आम लोगों को तेज, पारदर्शी और सुगम न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

55 कोर्टरूम और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस परिसर

करीब 7 एकड़ में फैला यह जिला न्यायालय परिसर उत्तर भारत का सबसे बड़ा कोर्ट कॉम्प्लेक्स माना जा रहा है। इसमें 8 और 7 मंजिला दो इंटरकनेक्टेड टावर बनाए गए हैं। परिसर में 55 जिला एवं सत्र न्यायालयों के कोर्टरूम, आधुनिक लाइब्रेरी, डिजिटल कोर्ट सुविधाएं, लगभग 1,500 वकीलों की क्षमता वाला बार रूम, सम्मेलन कक्ष और अंडरग्राउंड पार्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन व्यवस्थाओं से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

113 करोड़ से बढ़कर 295 करोड़ पहुंची परियोजना की लागत

इस परियोजना को मूल रूप से वर्ष 2020 तक पूरा किया जाना था, लेकिन निर्माण में हुई देरी के कारण इसका उद्घाटन करीब नौ वर्ष बाद हो सका। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत 113 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर लगभग 295 करोड़ रुपये हो गई। हाल ही में पुराने जिला न्यायालय परिसर में आग लगने के बाद अदालतों का काम अस्थायी रूप से पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस से संचालित किया जा रहा था। ऐसे में नए परिसर के शुरू होने से न्यायिक कार्यों को स्थायी और आधुनिक आधार मिलेगा।

मनोहर लाल बोले- त्वरित न्याय दिलाने में मील का पत्थर

कार्यक्रम में शामिल केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यह आधुनिक न्यायालय परिसर केवल एक नया भवन नहीं, बल्कि नागरिकों को सुलभ, सुरक्षित और पारदर्शी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने परिसर के निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों को सम्मानित किए जाने की भी सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित यह न्यायालय परिसर न्यायिक प्रक्रिया को अधिक दक्ष बनाएगा और नागरिकों को त्वरित एवं सुगम न्याय दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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