बहराइच, उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सामूहिक विवाह योजना के तहत रविवार को बहराइच के रामलीला ग्राउंड पर 411 जोड़ों ने एक साथ पवित्र बंधन में बंधे। इनमें 50 मुस्लिम जोड़े भी शामिल थे। यह कार्यक्रम सामाजिक सद्भाव और गरीब परिवारों की मदद का प्रतीक बन गया।
यूपी सरकार की इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं के विवाह को सरल, सस्ता और सम्मानजनक बनाना है। राज्य सरकार प्रत्येक जोड़े को आर्थिक सहायता, घरेलू सामान और अन्य सुविधाएं प्रदान करती है। आज के कार्यक्रम में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के जोड़ों ने साथ-साथ भाग लिया, जो उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है।
मौलवी और पंडितों का कराया विवाह
कार्यक्रम स्थल पर विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया सुबह से चल रही थी। मौलवी और पंडित दोनों समुदायों के रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न करा रहे थे। जोड़ों ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, फेरे लिए और मंत्रोच्चारण के साथ विवाह की परंपराएं पूरी कीं। महिलाओं और पुरुषों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।
अब तक लाखों जोड़ों को मिला लाभ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस योजना को बड़े स्तर पर लागू किया है। अब तक लाखों जोड़ों को लाभ मिल चुका है। योजना के तहत सरकार न केवल विवाह की लागत वहन करती है बल्कि जोड़ों को भविष्य की सुरक्षा के लिए भी मदद करती है। बहराइच ग्राउंड पर विशाल पंडाल लगाया गया था। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। स्थानीय लोगों ने इस आयोजन की सराहना की। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “सरकार गरीबों के लिए कुछ कर रही है, यह अच्छा है।”
सबका साथ सबका विवाह
इस सामूहिक विवाह में शामिल एक जोड़े ने बताया, “घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। सरकार की मदद से हमारा विवाह हो गया। हम बहुत खुश हैं।” मुस्लिम समुदाय के एक दूल्हे ने कहा, “सभी साथ में हैं, कोई भेदभाव नहीं।”यूपी सरकार का दावा है कि सामूहिक विवाह योजना बाल विवाह, दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों को कम करने में भी मदद कर रही है। योजना के तहत न्यूनतम आयु सीमा का पालन अनिवार्य है। यह कार्यक्रम न केवल 411 जोड़ों के लिए नया जीवन शुरू करने का अवसर था बल्कि पूरे राज्य के लिए एक सकारात्मक संदेश भी। उत्तर प्रदेश में ऐसे आयोजन बढ़ रहे हैं, जो विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में एक कदम हैं।