वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ होने वाले समझौते को लेकर ट्रुथ सोशल पर एक बार फिर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने लिखा कि रविवार को ईरान के साथ डील पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। उनके मुताबिक समझौते पर साइन होते ही होर्मुज स्ट्रेट को सभी देशों के लिए खोल दिया जाएगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा है और दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी है।
ओबामा के JCPOA पर समझौते की बात की
ट्रंप ने अपने समझौते की तुलना पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के ईरान परमाणु समझौते JCPOA से की। उन्होंने कहा कि ओबामा का समझौता ईरान के लिए परमाणु हथियार हासिल करने का आसान और सुगम रास्ता था। ट्रंप के अनुसार अगर वह डील चलती रहती तो ईरान को छह साल पहले ही परमाणु हथियार मिल गए होते। इसके उलट ट्रंप ने अपने समझौते को परमाणु हथियार न बनने देने वाली दीवार बताया। उनका दावा है कि अब ईरान खुद परमाणु हथियार नहीं चाहता और न ही खरीद, विकास या किसी अन्य माध्यम से इसे हासिल करेगा।
पैसों के लेनदेन से किया इनकार
ट्रंप ने साफ किया कि इस बार ओबामा प्रशासन की तरह ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर का भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली सरकार ने 1.7 अरब डॉलर नकद भी दिए थे। ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल में इस तरह का कोई लेनदेन नहीं होगा। उनका मानना है कि ईरान के साथ अमेरिका के रिश्ते अब पिछली सरकारों से कहीं अधिक भिन्न और बेहतर होंगे।
B-2 बमवर्षक का जिक्र और चेतावनी
अपनी पोस्ट में ट्रंप ने B-2 बमवर्षक विमानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर, जब सब कुछ शांत हो जाएगा, अमेरिका अपने कुशल पायलटों की मदद से पहाड़ों के नीचे दबे न्यूक्लियर डस्ट को नष्ट कर देगा। ट्रंप ने बताया कि यह कार्रवाई ईरान या अमेरिका, कहीं भी की जा सकती है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका ईरान और पूरे मिडिल-ईस्ट के साथ सहयोग को तैयार है, लेकिन अगर प्रक्रिया आसान नहीं रही तो उनके पास अंतिम विकल्प भी है जिसका इस्तेमाल दोबारा न करना पड़े।
ईरान ने साइन होने की बात से किया है इनकार
ट्रंप के दावे के उलट ईरान ने रविवार को डील साइन होने की बात से इनकार किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा कि आने वाले दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन इसकी तय तारीख बताना अभी जल्दबाजी होगी। ईरान के इस बयान के बाद शहबाज शरीफ के 24 घंटे में शांति समझौते पर साइन होने के दावे पर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।