हनोईः वियतनाम और दक्षिण कोरिया के दौरे पर गए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की परमाणु नीति को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने लिखा, “भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है और ‘नो फर्स्ट यूज़’ की नीति पर दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। भारत किसी भी प्रकार के न्यूक्लियर ब्लैकमेल को कभी स्वीकार नहीं करेगा।” उन्होंने यह संदेश बिना नाम लिए पाकिस्तान को दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत को न्यूक्लियर ब्लैकमेल करने का प्रयास किया था।
भारत जिम्मेदार परमाणु ताकत
राजनाथ सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर परमाणु सुरक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनाथ सिंह ने दोहराया कि भारत दुनिया की उन चुनिंदा परमाणु शक्तियों में शामिल है, जो अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करता है। भारत ने 1998 में परमाणु परीक्षणों के बाद अपनी परमाणु नीति स्पष्ट रूप से घोषित की थी, जिसमें ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति प्रमुख है। इसका मतलब है कि भारत किसी भी देश पर पहले परमाणु हमला नहीं करेगा।
भारत धमकी नहीं करेगा बर्दाश्त
रक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत किसी भी देश द्वारा परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करके धमकी देने या ब्लैकमेल करने की कोशिश को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। यह बयान भारत की रणनीतिक परिपक्वता और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। भारत की परमाणु नीति तीन प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है। इनमें पहले न्यूनतम निरोधक क्षमता, नो फर्स्ट यूज और बड़े पैमाने पर परमाणु हमले के जवाब में भारी प्रतिशोध। इस नीति के तहत भारत केवल तब परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करेगा, जब उसके विरुद्ध या उसके सहयोगी देशों के विरुद्ध परमाणु हमला किया जाए।
भारत ने दिया जिम्मेदारी का संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि राजनाथ सिंह का यह बयान वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में काफी प्रासंगिक है। जहां कुछ देश परमाणु हथियारों को लेकर आक्रामक बयानबाजी कर रहे हैं, वहां भारत शांति और जिम्मेदारी का संदेश दे रहा है। साथ ही, किसी भी ब्लैकमेल से निपटने की क्षमता और इच्छाशक्ति भी दिखा रहा है। भारत की यह नीति न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि वैश्विक परमाणु स्थिरता में भी योगदान देती है। राजनाथ सिंह का यह ट्वीट एक बार फिर साबित करता है कि भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।