लखनऊ: सीएम योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मजहबी आधार पर आरक्षण का हमेशा से विरोध करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों को मिलने वाले आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन धर्म के आधार पर आरक्षण स्वीकार्य नहीं है।
विपक्ष के सवाल पर दिया जवाब
विधानसभा के विशेष सत्र में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने पंचायती राज में 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर भाजपा के रुख पर सवाल उठाया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा हमेशा सामाजिक न्याय के तहत दिए जाने वाले आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन मजहबी आरक्षण का लगातार विरोध करती आई है।
विभाजन का हवाला
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश 1947 के विभाजन की त्रासदी देख चुका है और ऐसी परिस्थितियां दोबारा न बनें, यह सुनिश्चित करना हर जिम्मेदार राजनीतिक दल का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने राष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन करती रहेगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर भी टिप्पणी
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का विरोध कर महिलाओं को मिलने वाले राजनीतिक अधिकारों को बाधित करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि मजहबी आरक्षण का मुद्दा उठाकर असली उद्देश्य से ध्यान भटकाने का प्रयास किया गया।
महिला सशक्तिकरण पर सरकार का जोर
इससे पहले, सदन में प्रस्ताव रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान में लैंगिक समानता की स्पष्ट अवधारणा है, लेकिन महिलाओं को उनकी जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व अब तक नहीं मिल पाया है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया गया, ताकि महिलाओं की नीति-निर्धारण और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ सके।
सदन में व्यापक चर्चा
दिनभर चले इस विशेष सत्र में महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि पक्ष और विपक्ष के कुल 33 सदस्यों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया। सरकार का कहना है कि महिला सशक्तिकरण के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है और आगे भी इसे प्राथमिकता दी जाएगी।