दुबई: ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसियों ने बृहस्पतिवार को एक ऐसा ‘चार्ट’ जारी किया है, जिससे संकेत मिलता है कि देश के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाई हैं। इस घटनाक्रम को ऐसे संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य अमेरिका पर दबाव बनाना है। यह चार्ट ऐसे समय सामने आया है जब ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
चार्ट से बढ़ी चिंता
यह चार्ट आईएसएनए और तस्नीम समाचार एजेंसी ने प्रकाशित किया है, जिन्हें रिवोल्यूशनरी गार्ड के करीब माना जाता है। इसमें जहाजों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मार्ग ‘ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम’ के एक हिस्से को फारसी भाषा में “खतरे का क्षेत्र” बताते हुए एक बड़ा घेरा दिखाया गया है। इसी क्षेत्र में कथित तौर पर समुद्री सुरंगें बिछाई गई हैं। चार्ट में 28 फरवरी से लेकर 9 अप्रैल तक की अवधि दर्शाई गई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इन सुरंगों को हटाया गया है या अभी भी वहां मौजूद हैं।
जहाजों के लिए बदला मार्ग
चार्ट में जहाजों को लारक द्वीप के पास ईरान की मुख्यभूमि के करीब उत्तरी मार्ग से गुजरने का सुझाव दिया गया है। युद्ध के दौरान कई पोतों ने इस मार्ग का पालन भी किया। यह संकेत देता है कि क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों को लेकर खतरा बना हुआ है।
लेबनान में बढ़ा संघर्ष
युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही इजराइल ने मध्य बेरूत के घनी आबादी वाले इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें 182 लोगों की मौत हो गई। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। इजराइल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम समझौता लेबनान में तेहरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला के खिलाफ उसकी कार्रवाई पर लागू नहीं होता।
अलग-अलग बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि हिजबुल्ला के कारण लेबनान को युद्धविराम समझौते में शामिल नहीं किया गया और यह “अलग लड़ाई” है। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने लेबनान पर इजराइल के हमलों को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है और इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
फिर बढ़ा खतरा
इन घटनाओं के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया है। इस कदम से हाल में हुआ युद्धविराम खतरे में पड़ गया है और क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य या रणनीतिक कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े असर डाल सकता है।