नई दिल्ली: केंद्रीय बिजली, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल गुरुवार को चार दिन की आधिकारिक यात्रा पर भूटान पहुंचे। इस यात्रा के दौरान भारत और भूटान के बीच द्विपक्षीय वार्ताओं का मुख्य फोकस ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना सतत विकास को बढ़ावा देने पर रहेगा।
भूटान पहुंचने के बाद केंद्रीय मंत्री ने वहां के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास और आपसी सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को भविष्य में और व्यापक बनाया जाएगा।
ऊर्जा सहयोग पर की चर्चा
यात्रा के दौरान मनोहर लाल ने भूटान के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योंपो गेमे शेरिंग के साथ भी विस्तृत बातचीत की। इस बैठक में जलविद्युत परियोजनाओं में जारी सहयोग को और मजबूत करने, नई परियोजनाओं की संभावनाओं को तलाशने और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर एवं पवन ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर विचार किया गया। इसके साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर बिजली व्यापार को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच ऊर्जा विनिमय को और प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई।
‘पुनात्सांगछू-दो’ परियोजना पर समझौता
इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण परिणाम ‘पुनात्सांगछू-दो’ जलविद्युत परियोजना को लेकर रहा। दोनों देशों के बीच इस 1020 मेगावाट की परियोजना के लिए बिजली दरों से जुड़े नियमों पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग का एक बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। इस परियोजना से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली का भारत को निर्यात सितंबर 2025 से ही शुरू हो चुका है, जिससे दोनों देशों के ऊर्जा सहयोग को नई दिशा मिली है।
तकनीकी सहयोग और ग्रिड स्थिरता
दोनों देशों ने बिजली ग्रिड की स्थिरता बढ़ाने और सीमा पार बिजली व्यापार को सुचारू बनाने के लिए एक साझा तकनीकी ढांचे पर सहमति व्यक्त की। इससे भविष्य में बिजली आपूर्ति और वितरण को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। विद्युत मंत्रालय के अनुसार, भारत और भूटान के बीच संबंध आपसी विश्वास और सहयोग पर आधारित हैं। यह यात्रा इन संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दोनों देशों ने गैर-जलविद्युत ऊर्जा, बिजली पारेषण, हरित ऊर्जा परियोजनाओं और उनके वित्तपोषण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।