INS तारागिरी भारतीय नौसेना में हुआ शामिल, समुद्री ताकत को मिली नई ऊंचाई

विशाखापत्तनम: विशाखापत्तनम में स्वदेशी निर्मित उन्नत स्टेल्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, CDS जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस कमीशनिंग को भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक माना जा रहा है।

नौसेना की भूमिका और वैश्विक सुरक्षा

रक्षा मंत्री ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति समेत देश का लगभग 95% व्यापार समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में उभरते समुद्री खतरों के बीच वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा में भारतीय नौसेना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर, फारस की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य में लगातार सक्रिय रहती है।

हमारी नौसेना हमेशा रहती है सबसे आगे

राजनाथ सिंह ने कहा, “जब भी कोई संकट आता है चाहे लोगों को निकालने का अभियान हो या मानवीय सहायता हमारी नौसेना हमेशा सबसे आगे रहती है। INS तारागिरी की सेवा में शामिल होने से हमारी शक्ति और प्रतिबद्धता में वृद्धि होगी।”

समुद्री शक्ति और 2047 का विकसित भारत

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री 2047 तक विकसित भारत की दृष्टि में समुद्री शक्ति का महत्व अत्यधिक है। भारत की समुद्री सीमा 11,000 किलोमीटर से अधिक है और देश तीन तरफ समुद्र से घिरा हुआ है। समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल वित्तीय लेन-देन, संचार नेटवर्क और रक्षा समन्वय के लिए अहम हैं।

मजबूत नौसेना देश की आवश्यकता

रक्षा मंत्री ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार सक्रिय उपस्थिति बनाए रखना आवश्यक है। भारतीय नौसेना न केवल देश के हितों की रक्षा करती है, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुनिया भर में नागरिकों और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

INS तारागिरी की तकनीकी खासियत

INS तारागिरी, प्रोजेक्ट 17ए का चौथा प्लेटफॉर्म, 6,670 टन वजनी है। इसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई ने निर्मित किया है। यह तेज़ गति, लंबी तैनाती और गुप्त अभियान संचालन में सक्षम है। जहाज़ में आधुनिक रडार, सोनार, ब्रह्मोस मिसाइल और सतह-से-हवा मार करने वाली मिसाइलें लगी हैं। यह बहुउद्देशीय प्लेटफॉर्म समुद्री सुरक्षा, तटीय निगरानी, दस्यु-रोधी अभियान और मानवीय सहायता कार्यों में भी सक्षम है।

स्वदेशी निर्माण और रोजगार सृजन

यह जहाज़ 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है और 200 से अधिक छोटे एवं मध्यम उद्यमों को रोजगार देता है। राजनाथ सिंह ने इसे भारत की जिम्मेदार और मजबूत समुद्री शक्ति का प्रतीक बताया, जो पूरे क्षेत्र में शांति और समृद्धि सुनिश्चित करेगा।

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