नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते दुनिया भर में गैस और पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेकाबू हो गई हैं। भारत में भी आज से व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो गई है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी गई है। उद्योगों, होटलों और रेस्तरांओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर पूरी तरह से डिरेगुलेटेड हैं। इनकी कीमतें बाजार के आधार पर तय होती हैं और आमतौर पर हर महीने संशोधित की जाती हैं। देश में कुल एलपीजी खपत का मात्र 10 प्रतिशत से भी कम हिस्सा इन व्यावसायिक सिलेंडरों का है।
जानें किन सिलेंडर के बढ़े दाम
सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 1 अप्रैल से 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत में औसतन 195.50 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली में अब इसकी कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है। कोलकाता में बढ़ोतरी ज्यादा रही और कीमत 2,208 रुपये तक पहुंच गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से सऊदी अरब कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi Contract Price) में भारी उछाल के कारण हुई है। मार्च में यह 542 डॉलर प्रति मीट्रिक टन था, जो अप्रैल में बढ़कर 780 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गया। यानी करीब 44 प्रतिशत की तेजी।
हॉर्मुज़ की नाकाबंदी का दुनिया पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक एलपीजी आपूर्ति का 20-30 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में फंसा हुआ है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतें आसमान छू रही हैं।
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं
हालांकि, आम नागरिकों और घरेलू उपभोक्ताओं को इस बढ़ोतरी से कोई असर नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता के अनुरूप सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी तरह संरक्षित रखा है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर अपरिवर्तित बनी हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को यह सिलेंडर मात्र 613 रुपये में ही उपलब्ध रहेगा।
कितना घटा झेल रहीं कंपनियां
वर्तमान कीमतों पर तेल कंपनियां प्रति घरेलू सिलेंडर 380 रुपये की अंडर रिकवरी झेल रही हैं। मई के अंत तक इनका कुल संचयी घाटा लगभग 40,484 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। पिछले वित्तीय वर्ष में भी कुल 60,000 करोड़ रुपये के घाटे में से 30,000 करोड़ रुपये तेल सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) ने और 30,000 करोड़ रुपये भारत सरकार ने वहन किए थे। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार की ऊंची कीमतों से आम भारतीय नागरिक को बचाना था।
अन्य देशों की अपेक्षा भारत में कीमतें बहुत कम
भारत में घरेलू एलपीजी की कीमत विश्व के कई देशों की तुलना में अभी भी काफी कम है। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान में यह 1,046 रुपये, श्रीलंका में 1,242 रुपये और नेपाल में 1,208 रुपये है। सरकार का स्पष्ट प्रयास है कि रसोई गैस महंगाई का बोझ आम आदमी पर न पड़े।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में सरकार लगातार इस दिशा में प्रयासरत है कि ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित हो। भारतीय ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां भी इस चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य में संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर रही हैं।