पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को राज्य विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्या सभा चुनाव जीतने के बाद संवैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए यह कदम उठाया। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया। सीएम आवास से जद(यू) एमएलसी संजय गांधी ने उनका इस्तीफा पत्र सौंपा।
नीतीश कुमार गत 16 मार्च को राज्या सभा के लिए निर्वाचित हुए थे। संविधान के अनुसार, किसी व्यक्ति को संसद और राज्य विधानमंडल दोनों की सदस्यता एक साथ नहीं रखनी होती। उन्हें 14 दिनों के अंदर एक पद छोड़ना अनिवार्य था। 30 मार्च आखिरी तारीख थी। वे 10 अप्रैल को राज्या सभा की सदस्यता की शपथ ले सकते हैं।
बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव
यह इस्तीफा बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री रहे हैं। अब उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की भी चर्चा जोरों पर है। सूत्रों के अनुसार, वे कुछ दिनों या अप्रैल के मध्य में सीएम पद छोड़ सकते हैं। इसके बाद एनडीए गठबंधन नया मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
नए मुख्यमंत्री के संभावित चेहरे
राजनीतिक गलियारों में सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सम्राट चौधरी का नाम आगे है। वे बिहार के डिप्टी सीएम और भाजपा विधायक दल के नेता हैं। भाजपा की ओर से पहली बार सीएम पद पर काबिज होने की संभावना जताई जा रही है। अन्य प्रमुख नामों में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, जद(यू) के कुछ नेताओं द्वारा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और अन्य भाजपा नेता जैसे दिलीप कुमार जायसवाल, विजय सिन्हा आदि शामिल हैं। जद(यू) का कहना है कि नया सीएम नीतीश कुमार की पसंद का होना चाहिए। एनडीए की बैठक में अंतिम फैसला होगा।
यह बदलाव बिहार की सत्ता संतुलन को प्रभावित करेगा। 18 साल बाद भाजपा सीएम पद पर आने की तैयारी में है। नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं, जबकि राज्य में नई नेतृत्व व्यवस्था बनेगी।