वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 बिंदुओं वाला युद्धविराम प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक पहुंचाया गया है। जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की पेशकश भी की है। हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
ट्रंप द्वारा ईरान को भेजे गए युद्ध विराम प्रस्ताव की प्रमुख शर्तें
ईरान को अपने वर्तमान परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह विघटित करना होगा।
ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता देनी होगी।
ईरानी क्षेत्र के अंदर किसी भी प्रकार का यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
60 प्रतिशत संवर्धित लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम का स्टॉक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंपना होगा।
नतांज, इस्फहान और फोर्डो स्थित परमाणु सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट करना होगा।
IAEA को पूरे ईरान में पूर्ण पहुंच और पूर्ण पारदर्शिता प्रदान करनी होगी।
ईरान को अपने क्षेत्रीय प्रॉक्सी ऑपरेशनों को समाप्त करना होगा।
सहयोगी मिलिशिया समूहों को समर्थन बंद करना होगा।
हार्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक नौवहन के लिए हमेशा खुला रखना होगा।
ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को रेंज और मात्रा दोनों में सीमित करना होगा।
भविष्य में किसी भी मिसाइल का उपयोग सख्ती से केवल आत्मरक्षा तक ही सीमित रहेगा।
सैन्य तैयारी भी जारी
कूटनीतिक कोशिशों के साथ-साथ अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ानी शुरू कर दी है। क्षेत्र में पहले से मौजूद करीब 50,000 सैनिकों के अलावा कम से कम 1,000 और सैनिक भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा दो मरीन यूनिटों को भी तैनात किया जा रहा है, जिससे हजारों मरीन और नौसैनिक क्षेत्र में पहुंचेंगे। 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों को भी अलर्ट पर रखा गया है, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि अमेरिका इन कदमों के जरिए अपने पास सभी विकल्प खुले रखना चाहता है। यानी अगर बातचीत सफल होती है तो एक रास्ता और अगर हालात बिगड़ते हैं तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी तैयार रहे।
ट्रंप का दावा ईरान ने किया इनकार
ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान से बातचीत कर रहा है और समझौते की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टीम के कई बड़े अधिकारी इस प्रक्रिया में शामिल हैं। दूसरी ओर, ईरान ने किसी भी सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनकी सेना पूरी ताकत के साथ लड़ाई जारी रखेगी।
हार्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा
इस पूरे विवाद में हार्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दा बन गया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। ईरान द्वारा इस पर नियंत्रण बनाए रखने से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
बातचीत में बड़ी चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता आसान नहीं होगा। खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरा मतभेद है। इसके अलावा यह भी साफ नहीं है कि ईरान की ओर से बातचीत कौन करेगा। इस बीच, क्षेत्र में हमले रुक नहीं रहे हैं। इजराइल ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमला किया है। वहीं ईरान ने जवाब में मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। सऊदी अरब ने अपने इलाके की ओर आ रहे ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है, जबकि कुवैत में हमलों से बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है।
लेबनान में बढ़ा तनाव
लेबनान में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इजराइल ने बेरूत के दक्षिणी हिस्सों पर बमबारी की, जिसमें कई लोगों की मौत हुई है। इसके बाद लेबनान ने ईरान के राजदूत को देश छोड़ने का आदेश दे दिया और ईरानी उड़ानों पर रोक लगा दी है। कुल मिलाकर, एक तरफ बातचीत की कोशिशें चल रही हैं और दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई भी जारी है। ऐसे में मध्य पूर्व की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और आने वाले समय में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह अभी तय नहीं है।