मॉस्को: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार देर रात लगभग एक घंटे तक फोन पर वार्ता की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब ईरान पर अमेरिकी-इजराइली हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया है और वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।
ईरान और यूक्रेन पर केंद्रित वार्ता
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने बताया कि वार्ता का मुख्य फोकस अमेरिका और ईरान तथा रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्षों को सुलझाने पर था। उशाकोव ने कहा कि दोनों राष्ट्रपतियों के बीच संवाद “व्यावहारिक और रचनात्मक” था। पुतिन ने ईरान में हालिया तनाव और खाड़ी देशों के नेताओं तथा ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के साथ अपनी पिछली बातचीत पर ट्रंप को जानकारी दी।
ऊर्जा और वैश्विक तेल प्रवाह पर चर्चा
पुतिन ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने के कारण। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि मॉस्को अपने मित्र देशों जैसे भारत और चीन के लिए विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है और यदि यूरोपीय संघ प्रतिबंध हटाने को तैयार है तो रूस दीर्घकालिक आधार पर आपूर्ति फिर से शुरू कर सकता है।
भारत के लिए तेल आपूर्ति का संकेत
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वाशिंगटन ने भारत को रूसी समुद्री मार्ग से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, रूस अब भारत को अपनी तेल आपूर्ति लगभग दोगुना कर सकता है। ‘कोमर्सेंट डेली’ के विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी लाइसेंस के बाद भारतीय रिफाइनरियों को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है। इस फोन कॉल ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक भू-राजनीति पर तत्काल प्रभाव डालने की संभावना जताई है, जबकि अमेरिका और रूस दोनों ने वार्ता को समाधान-केंद्रित बताया।