New Delhi: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को नई दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम में दो साल बाद पहली बार मीडिया से वर्चुअल (ऑडियो) संवाद किया। 5 अगस्त 2024 को छात्र-जनता के आंदोलन के बाद सत्ता छोड़कर भारत आई हसीना ने कहा कि वे देश से जबरन दूर हुईं, लेकिन अपने लोगों से कभी अलग नहीं हुईं।
भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “पिछले दो साल से मैंने अपने प्रिय बांग्लादेश को तड़पते देखा है। यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसे हमने बनाया था। यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसके लिए 1971 में लाखों लोगों ने अपना जीवन बलिदान किया।” उन्होंने 2024 के जुलाई-अगस्त के आंदोलन को शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन न बताते हुए आरोप लगाया कि संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदल दिया। उनके अनुसार, सरकार ने संवाद और कानूनी प्रक्रिया के जरिए मुद्दा सुलझाने की पूरी कोशिश की थी।
आवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग
पूर्व प्रधानमंत्री ने आवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग की और दोहराया कि वे बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मृत्युदंड, झूठे मामले और राजनीतिक रूप से प्रेरित मुकदमे उन्हें डरा नहीं सकते। “वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, यहां तक कि मार भी सकते हैं… फिर भी मुझे जाना होगा,”। उन्होंने दिसंबर तक देश लौटने का संकेत दिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के लोगों के लोकतंत्र, न्याय तथा शांति के संघर्ष में साथ देने की अपील की।
कार्यक्रम में उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय और अन्य आवामी लीग नेताओं ने भी भाग लिया। भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि यह निजी आयोजन है और इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है। बांग्लादेश सरकार ने स्थानीय मीडिया से हसीना के बयान प्रसारित न करने की अपील की थी।
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उनके सत्ता से हटने की दूसरी वर्षगांठ पर हुई। हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराधों का आरोप लगाकर अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसे वे अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती हैं।