नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश की शिक्षा व्यवस्था को अर्थव्यवस्था की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की प्रक्रिया तेज करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में शिक्षा, कौशल और उद्योग के बीच मजबूत तालमेल बेहद जरूरी है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को भी नई आर्थिक जरूरतों के अनुरूप ढालना होगा।
उभरती तकनीकों पर ध्यान देने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में कृत्रिम मेधा (AI) स्वचालन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजाइन आधारित विनिर्माण जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में कौशल विकसित करने से युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधार
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश अब रोकथाम आधारित और समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में देश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया गया है और सैकड़ों जिलों में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं। साथ ही आयुष्मान भारत योजना और ‘आरोग्य मंदिर’ जैसी पहलों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच गांव-गांव तक बढ़ाई गई है।
योग और आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियां योग और आयुर्वेद आज दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं, जिससे भारत की स्वास्थ्य परंपराओं को वैश्विक पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ दिनों से बजट 2026-27 में प्रस्तावित विभिन्न पहलों पर चर्चा के लिए आयोजित वेबिनार में भाग ले रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार को यह वेबिनार आयोजित किया गया।