India on Shaksgam Valley: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 13 जनवरी 202 को नई दिल्ली में अपनी वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) पर भारत का सख्त रुख दोहराया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 में हुआ सीमा समझौता पूरी तरह अवैध और अमान्य है। जनरल द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि शाक्सगाम घाटी भारत का अभिन्न अंग है और भारत इस क्षेत्र में चीन या पाकिस्तान द्वारा की गई किसी भी गतिविधि को मान्यता नहीं देता।
यह बयान चीन के हालिया दावों के जवाब में आया है, जहां चीन ने शाक्सगाम घाटी पर अपना मालिकाना हक जताया और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत वहां बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को जायज ठहराया। चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा था कि यह क्षेत्र चीन का है और वहां निर्माण कार्य “उचित” है। भारत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
शाक्सगाम घाटी जम्मू-कश्मीर का हिस्सा
शाक्सगाम घाटी जम्मू-कश्मीर के हिस्से में आती है, जो कराकोरम रेंज में स्थित है। 1963 के समझौते के तहत पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जे वाले करीब 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र को चीन को सौंप दिया था। भारत ने शुरू से ही इस समझौते को गैर-कानूनी माना है, क्योंकि पाकिस्तान का उस क्षेत्र पर कोई वैध अधिकार नहीं था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी दोहराया कि शाक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है और 1963 का समझौता अमान्य है।
LAC पर सतर्कता बढ़ाने का आह्वान
जनरल द्विवेदी ने LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर स्थिति को स्थिर लेकिन सतर्क बताया। उन्होंने कहा कि भारत LAC पर शांति बनाए रखने के लिए प्रयासरत है, लेकिन किसी भी उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार है। CPEC को भी उन्होंने दोनों देशों की अवैध कार्रवाई करार दिया।