कुरुक्षेत्र में पहलगाम पर गरजे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, बोले-“दुश्मन हमारी शालीनता को कमजोरी समझ बैठे थे”

Rajnath Singh, Defense Minister

Rajnath Singh on pahelgam(कुरुक्षेत्र):-रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कुरुक्षेत्र के एक कार्यक्रम में पहलगाम हमले अपना आक्रोश जाहिर किया। उन्होंने कहा कि पहलगाम की घटना आज भी राष्ट्रीय स्मृति को विचलित करती है। जब पहलगाम में पर्यटन के लिए गए हमारे निर्दोष यात्रियों को धर्म पूछ कर मारा गया। कितना क्रूर संदेश उन आतंकवादियों ने दिया था। मैं मानता हूं कि यह हमला सिर्फ भारत की शांतिप्रियता को ही चुनौती नहीं थी दे रहा था, बल्कि आतंकवादी और उनके सरपरस्त मान बैठे थे कि भारत की शालीनता उसकी कमजोरी है। वे भूल गए कि भारत गीता का देश है जहां करुणा भी है और युद्ध में धर्म रक्षा की प्रेरणा भी है।

ऑपरेशन सिंदूर से दुश्मन को दिया माकूल जबाव

रक्षा मंत्री रक्षा मंत्री ने कहा कि शांति के ताप को जीवित रखना है तो उसके भीतर शक्ति का ताप अनिवार्य है। निर्दोषों की रक्षा करनी है तो बलिदान देने का साहस भी उतना ही आवश्यक है। दुश्मन हमारी शालीनता को कमजोरी समझ बैठे थे, लेकिन उन्हें ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम के भारत ने ऐसा जवाब दिया कि दुश्मन हमेशा याद रखेंगे। हमने दुनिया को दिखाया भारत लड़ाई नहीं चाहता है, लेकिन यदि मजबूर किया गया तो भारत लड़ाई से भागता नहीं है… बल्कि माकूल जवाब भी देता है। ऑपरेशन सिंदूर को मैं मानता हूं केवल ये केवल सैन्य कार्वारई नहीं थी, बल्कि भारत की आत्मप्रतिबद्धता औेर आत्म सम्मान की घोषणा थी। 

भगवान श्रीकृष्ण के गीता संदेश का दिया उदाहरण

भगवान श्रीकृष्ण ने भी पांडवों को यही समझाया था कि युद्ध बदले की भावना या महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना के लिए लड़ा जाना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने भगवान श्रीकृष्ण के संदेश का ही पालन किया। भारत ने जबाव दिया कि भारत आतंकवाद के विरुद्ध लड़ेगा और किसी भी सूरत में भारत कमजोर नहीं पड़ेगा। श्री कृष्ण अर्जुन को कुरुक्षेत्र में समझाया था धर्म की रक्षा केवल प्रवचन से नहीं होती, उसकी रक्षा कर्म से होती है और ऑपरेशन सिंदूर वही धर्म युक्त कर्म था।

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल हुए रक्षा मंत्री

रक्षामंत्री यहां अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज जब मैं भगवान श्री कृष्ण की पवित्र भूमि पर खड़ा हूं… मेरा मन स्वाभाविक रूप से श्रद्धा से भरा हुआ है, जहां 5000 से अधिक वर्ष पहले समस्त मानवता के उत्थान के लिए दिव्य ज्ञान प्रकट हुआ था। किसी को अगर भारत की आत्मा को समझना है तो उसे कुरुक्षेत्र की धूल में उसका प्रतिबिंब ढूंढना चाहिए… आप सोचिए कैसा होगा अर्जुन… हाथ जोड़.. भगवान श्री कृष्ण के सामने खड़े होंगे और योगेश्वर श्रीकृष्ण ने मुस्कुराकर गीता का यह संदेश उन्हें दिया होगा।

कुरुक्षेत्र की यह धरती आज भी योगेश्वर श्री कृष्ण की उन प्रेरक स्वरों से पूछ रही है और उनकी ध्वनि आज भी हमारे भीतर प्रतिबंधित हो रही है। आप सभी भावना को महसूस करते होंगे की। अर्जुन के सामने भगवान कृष्ण ने जो ज्ञान दिया वह केवल उसे समय के लिए नहीं था, बल्कि शरीर के लिए था और पूरी मानवता के लिए था…केवल भारत में रहने वाले लोगों के लिए नहीं था पूरे विश्व के लिए आत्मा कभी मरती है।

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