बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश सरकार मानसून के मौसम में पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए एक विशेष नीति तैयार कर रही है। राज्य के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मंगलवार को बताया कि मानसून के दौरान आमतौर पर पर्यटन गतिविधियों में गिरावट देखी जाती है, जिससे राजस्व पर असर पड़ता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है।
सालभर पर्यटन को बनाए रखने का लक्ष्य
मंत्री धर्माणी ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि सरकार का उद्देश्य मानसून के महीनों को भी पर्यटकों के लिए उतना ही आकर्षक बनाना है, जितना गर्मी या सर्दी का मौसम होता है। उन्होंने कहा कि अगर मानसून पर्यटन को सही ढंग से विकसित किया जाए तो यह प्रदेश के लिए स्थायी आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है।
‘मानसून पर्यटन सर्किट’ का प्रस्ताव
धर्माणी ने बताया कि सरकार ‘मानसून पर्यटन सर्किट’ तैयार करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित जलाशयों, झीलों और प्राकृतिक स्थलों को विकसित किया जाएगा। इस योजना के तहत मानसून के दौरान भी पर्यटकों को आकर्षित करने वाली गतिविधियां, जैसे जल क्रीड़ा, नौकायन और स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
जल क्रीड़ा गतिविधियों की संभावनाएं
मंत्री ने कहा किबिलासपुर, कोल डैम, कांगड़ा और सुंदरनगर जैसे क्षेत्रों में मानव निर्मित झीलों में पूरे वर्ष जल स्तर स्थिर रहता है, जो मानसून सीज़न में जल क्रीड़ा गतिविधियों के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि इन स्थलों को विकसित कर पर्यटन को नया आयाम दिया जा सकता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
धर्माणी ने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित नीति से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और मानसून के महीनों में भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था सशक्त बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार शीघ्र ही इस नीति का प्रारूप तैयार कर उसे कैबिनेट के समक्ष रखेगी।