Foreign Minister S Jaishankar: (न्यूयॉर्क): भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों से मिलकर काम करने और संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी ताकि वे वैश्विक फैसलों में बराबरी से भाग ले सकें।
जयशंकर ने यह बात ‘ग्लोबल साउथ’ के समान विचारधारा वाले देशों की एक उच्च-स्तरीय बैठक में कही, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के इतर आयोजित की गई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया कई गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, जिनका सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों पर पड़ा है।
ग्लोबल साउथ को मिलकर बनाना होगा मजबूत मोर्चा
मंत्री जयशंकर ने कहा कि दुनिया भर के विकासशील देश, जिन्हें ‘ग्लोबल साउथ’ कहा जाता है, आज कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इनमें महामारी के बाद की परेशानियाँ, यूक्रेन और गाजा में चल रहे युद्ध, जलवायु परिवर्तन की मार, महंगाई, व्यापार में अस्थिरता और विकास के लक्ष्य पूरे न हो पाना शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “इन परिस्थितियों में ग्लोबल साउथ को एकजुट होकर मिलकर काम करना होगा। हमें एक साझा सोच और रणनीति बनानी होगी, ताकि हमारी आवाज़ वैश्विक स्तर पर सुनी जा सके। जयशंकर ने यह भी कहा कि बहुपक्षवाद यानी सभी देशों को मिलाकर चलने वाली व्यवस्था आज खतरे में है। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे संयुक्त राष्ट्र अब उतनी प्रभावशाली नहीं रह गई हैं और संसाधनों की कमी से जूझ रही हैं। ऐसे में ‘ग्लोबल साउथ’ को चाहिए कि वह मिलकर इन संस्थाओं में सुधार की मांग करे।
आर्थिक निर्भरता घटाने और सहयोग बढ़ाने की ज़रूरत
जयशंकर ने ज़ोर देकर कहा कि अब समय आ गया है जब विकासशील देशों को अपनी आर्थिक रणनीति बदलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी एक देश या बाजार पर निर्भर रहने के बजाय, अब लचीली और छोटी आपूर्ति श्रृंखलाएं बनानी होंगी।उन्होंने कहा हमें उत्पादन के लोकतंत्रीकरण की दिशा में काम करना होगा। इसका मतलब है कि उत्पादन और व्यापार कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित न रहे, बल्कि सभी देशों को इसका लाभ मिले। जयशंकर ने यह भी कहा कि दक्षिण-दक्षिण व्यापार यानी विकासशील देशों के बीच आपसी व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना चाहिए। इसके अलावा, तकनीकी सहयोग, खासकर डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में भी मिलकर काम करना होगा।
भारत उठाता रहा ग्लोबल साउथ की आवाज़
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत लगातार ग्लोबल साउथ की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है और आगे भी ऐसा करता रहेगा। उन्होंने बताया कि भारत चाहता है कि सभी विकासशील देशों को वैश्विक फैसलों में हिस्सा लेने का बराबरी का मौका मिले।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्लोबल साउथ को जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई),शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और लघु उद्योगों के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करने चाहिए, ताकि दूसरे देशों को भी फायदा मिल सके। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि केवल ग्लोबल नॉर्थ यानी विकसित देशों के नजरिए से दुनिया नहीं चल सकती। ग्लोबल साउथ को भी अपनी बात मजबूती से रखनी होगी और अपने हितों की रक्षा करनी होगी।