Justice Verma cash scandal: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली स्थित उनके घर के बाहर जले हुए कैश (नकदी) मिलने के मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत यह प्रस्ताव 31 जुलाई को लोकसभा को सौंपा गया था, जिसे 146 सांसदों ने हस्ताक्षरित किया था।
जांच समिति गठित
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस संवेदनशील मामले पर कार्रवाई करते हुए जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। इस जांच समिति में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस मनिंदर मोहन और वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य को शामिल किया गया है।
मार्च 2025 में हुई थी घटना
मार्च 2025 में राजधानी दिल्ली में जस्टिस वर्मा के निवास के बाहर बड़ी मात्रा में जले हुए नोट मिलने की घटना सामने आई थी। इस रहस्यमयी मामले ने न्यायपालिका और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। शुरुआती जांच और जनदबाव के बाद उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से स्थानांतरित कर इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजा गया था। इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए संसद में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे अब औपचारिक रूप से स्वीकार कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जस्टिस वर्मा की याचिका हो चुकी खारिज
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संविधान के तहत जो भी प्रक्रिया निर्धारित है, वह पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ अपनाई जाएगी। उधर, जस्टिस वर्मा ने संसद द्वारा उठाए गए इस कदम को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने 7 अगस्त को उनकी याचिका खारिज कर दी। इससे संसद की कार्यवाही को कानूनी वैधता भी मिल गई है। यह मामला न केवल न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी एक बड़ा संदेश देता है। अब सबकी निगाहें इस उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट और भविष्य की कार्रवाई पर टिकी होंगी।