Himachal Rain and Landslides: (शिमला): हिमाचल प्रदेश में मानसून के चलते लगातार हो रही तेज बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में रविवार को अत्यधिक वर्षा की चेतावनी को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है और जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।”हम तैयार हैं,
700 करोड़ रुपये तक का संभावित नुकसान
राज्य आपातकालीन अभियान केंद्र (SEOC) के अनुसार, अब तक करीब ₹566 करोड़ के नुकसान का आकलन किया गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि वास्तविक नुकसान ₹700 करोड़ से भी अधिक हो सकता है, क्योंकि डेटा संग्रह की प्रक्रिया अभी चल रही है।
कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी
स्थानीय मौसम विभाग ने कांगड़ा, सिरमौर और मंडी में रेड अलर्ट, जबकि अन्य सात जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चंबा, कुल्लू, बिलासपुर, शिमला, सोलन और हमीरपुर जिलों में अगले 24 घंटों में मध्यम से उच्च स्तर की बाढ़, भूस्खलन, फसलों, संरचनाओं, और आवश्यक सेवाओं को नुकसान की आशंका जताई गई है। लोगों को जल स्रोतों और संवेदनशील स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
मंडी जिले में बादल फटने की घटनाएं, 31 लोग लापता
मंडी जिले के पधर क्षेत्र के शिलभडानी गांव में स्वाड नाले में बादल फटने की घटना के बाद कई सड़क संपर्क मार्ग और छोटे पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हालाँकि, अब तक किसी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। हाल में मंडी में हुई बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की 10 घटनाओं में भारी तबाही हुई है। अब तक 14 शव बरामद किए गए हैं, जबकि 31 लोग अभी भी लापता हैं। इनकी तलाश के लिए खोजी कुत्तों और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
74 लोगों की मौत, 115 घायल
20 जून को मानसून के आगमन के बाद से अब तक राज्य में 74 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 47 मौतें बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन जैसी वर्षा जनित घटनाओं में हुई हैं। साथ ही 115 लोग घायल हुए हैं।
भारी वर्षा से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
भारी बारिश ने हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों को प्रभावित किया है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक वर्षा कांगड़ा जिले के नागरोटा सूरियां में दर्ज की गई, जहां 102.4 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा, ऊना में 67.2 मिमी, गुलर में 62.4 मिमी, और धर्मशाला में 61.1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। मंडी में भी 21.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिससे वहां की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विशेषकर निचले और मध्य पर्वतीय जिलों में भारी वर्षा ने बाढ़ और भूस्खलन का खतरा और अधिक बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये आंकड़े सामान्य से काफी अधिक हैं और इस कारण राज्य के कई हिस्सों में जलभराव, सड़कें बाधित होने, और संरचनात्मक क्षति की घटनाएं सामने आ रही हैं।
बिजली और पानी की सप्लाई पर असर
लगातार बारिश और आपदा के कारण राज्य भर में 258 ट्रांसफॉर्मर और 278 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में बिजली और जलापूर्ति बाधित है।