(रांची) केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भारत में अगली पीढ़ी के सार्वजनिक परिवहन के लिए एक दृष्टिकोणपरक और क्रांतिकारी योजना का खाका पेश किया है। उन्होंने कहा कि देश का परिवहन क्षेत्र एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है, जिसमें तकनीक, पर्यावरण और तेज रफ्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। मंत्री ने बताया कि भारत में जल्द ही शहरी इलाकों में इलेक्ट्रिक रैपिड ट्रांजिट, हाइपरलूप, और दुर्गम क्षेत्रों में रोपवे, केबल बसें और फनिक्युलर रेलवे जैसी अत्याधुनिक प्रणालियाँ शुरू की जाएंगी।
नई सड़कों और हरियाली की योजना
मंत्री ने कहा कि सरकार 25,000 किलोमीटर दो लेन वाली सड़कों को चार लेन में बदलने पर काम कर रही है। इसके अलावा, प्रति दिन 100 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि 2013-14 में जहां देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 91,287 किलोमीटर थी, वहीं अब यह बढ़कर 1,46,204 किलोमीटर हो चुकी है।
इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय हाई-स्पीड कॉरिडोर (HSC) की लंबाई 2014 के 93 किलोमीटर से बढ़ाकर 2,474 किलोमीटर तक पहुंचाने का भी उल्लेख किया। गडकरी ने यह भी कहा कि सड़कों के किनारे 20–25 करोड़ पेड़ लगाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत एक पेड़ काटने पर पांच नए पेड़ लगाने और पुराने पेड़ों को प्रत्यारोपित करने की नीति अपनाई जाएगी। “ट्री बैंक” परियोजना को लेकर पर्यावरण मंत्रालय के साथ बातचीत अंतिम चरण में है।
आधुनिक शहरों के लिए भविष्य की ट्रांजिट योजनाएं
गडकरी ने कहा कि दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में जल्द ही हाइपरलूप, मेट्रिनो पॉड टैक्सी, और पिलर आधारित मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसी परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। यह एक परिवहन क्रांति होगी, जिसमें तकनीक और निवेशक दोनों जुड़ रहे हैं। उन्होने बताया कि नागपुर में 135 सीट वाली इलेक्ट्रिक रैपिड ट्रांजिट बस की पायलट परियोजना शुरू की गई है। इस बस में एग्जीक्यूटिव क्लास सीटें, एयरलाइन-ग्रेड सुविधाएं, और 120–125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार होगी।
दुर्गम क्षेत्रों के लिए विशेष समाधान
गडकरी ने कहा कि केदारनाथ समेत 360 स्थानों पर रोपवे, केबल कार और फनिक्युलर रेलवे का निर्माण किया जा रहा है। इनमें से 60 परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। फनिक्युलर रेलवे प्रणाली खासतौर से पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों और सामान को कुशलतापूर्वक ऊपर-नीचे लाने के लिए बेहद उपयोगी है। इन परियोजनाओं की लागत ₹200 करोड़ से ₹5,000 करोड़ के बीच होगी और ये देश के परिवहन परिदृश्य की सूरत बदल देंगी।
हरित और वैकल्पिक ईंधन की दिशा में प्रगति
मंत्री ने बताया कि टाटा, टोयोटा, हुंडई और महिंद्रा सहित 11 प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाहनों के निर्माण पर सहमति जताई है। ये वाहन जैव ईंधन, एथनॉल, मेथनॉल और पारंपरिक ईंधनों के मिश्रण से चलेंगे। इससे ईंधन आयात कम होगा और जैविक विकल्पों को बढ़ावा मिलेगा।