ईरान का बड़ा बयान: परमाणु ठिकानों से विकिरण रिसाव नहीं, स्थानीय लोगों को खतरा नहीं

Iran us War

Iran Israel War: दुबई: ईरान ने रविवार को कहा कि हाल ही में अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों के बाद इस्फहान, फोर्डो और नतांज में स्थित उसके प्रमुख परमाणु केंद्रों से किसी भी तरह के रेडियोधर्मी रिसाव के कोई संकेत नहीं मिले हैं। यह जानकारी ईरान की सरकारी मीडिया ने राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रणाली केंद्र के हवाले से दी है। बयान में बताया गया कि हमलों के बाद इन परमाणु स्थलों पर तैनात विकिरण डिटेक्शन सिस्टम सक्रिय कर दिए गए थे। उन्होंने किसी भी रेडियोधर्मी उत्सर्जन को दर्ज नहीं किया।स्थानीय निवासियों को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं है। सभी उपकरणों ने सामान्य स्थिति को दर्शाया है,”

IAEA ने भी की पुष्टि

इससे पहले, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी पुष्टि की थी कि ईरान में हाल ही में हुए हवाई हमलों के बावजूद परमाणु स्थलों से किसी प्रकार का रेडियोधर्मी रिसाव सामने नहीं आया है। एजेंसी ने यह बयान तब दिया जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि हमले के कारण संभावित रेडियोधर्मी खतरा उत्पन्न हो सकता है। IAEA ने कहा कि वे लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और ज़रूरत पड़ने पर स्वतंत्र निरीक्षण के लिए तैयार हैं। एजेंसी ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की अपील की और सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा।

अमेरिका का हमला और उसका उद्देश्य

बता दें कि इससे एक दिन पहले अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों पर सैन्य हमला किया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई को “सटीक और सफल” बताते हुए दावा किया कि सभी अमेरिकी विमान सुरक्षित लौट आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब “शांति की ओर कदम बढ़ाने का समय है।”

हमले में अमेरिका ने अपने बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स का प्रयोग किया, जो अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं और रडार से बचकर गहरे हमले करने की क्षमता रखते हैं। ये बमवर्षक विमानों ने फोर्डो, नतांज और इस्फहान जैसे ठिकानों को निशाना बनाया, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माने जाते हैं।

फोर्डो: सबसे सुरक्षित परमाणु ठिकाना

विशेष रूप से फोर्डो को ईरान का सबसे सुरक्षित परमाणु ठिकाना माना जाता है। यह एक पहाड़ी के नीचे गहराई में स्थित है, जिससे इसे किसी भी सामान्य हवाई हमले से बचाया जा सके। इस ठिकाने के अस्तित्व का खुलासा 2009 में हुआ था और तब से यह अंतरराष्ट्रीय निगरानी में भी रहा है। अमेरिका का दावा है कि इस ठिकाने पर “पूरा पेलोड” गिराया गया, जिससे उसके भारी नुकसान की संभावना जताई गई थी, लेकिन ईरान के अनुसार अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।

क्षेत्रीय और वैश्विक चिंता

अमेरिकी हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस हमले का बदला लेने के लिए कूटनीतिक या अप्रत्यक्ष सैन्य मार्ग अपना सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय विशेषकर संयुक्त राष्ट्र, रूस, चीन और यूरोपीय संघ ने हालात पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम की अपील की है। इस घटना से ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर चल रही बातचीत पर भी असर पड़ सकता है।

ईरान द्वारा यह स्पष्ट किया जाना कि अमेरिकी हमलों के बाद उसके परमाणु ठिकानों से किसी प्रकार का रेडियोधर्मी रिसाव नहीं हुआ है, क्षेत्रीय नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक राहत की खबर हो सकती है। हालांकि भू-राजनीतिक दृष्टि से यह स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह सैन्य कार्रवाई किसी व्यापक संघर्ष की ओर ले जाएगी या फिर कूटनीतिक समाधान की दिशा में बढ़ेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *