G7 Summit 2025: कनैनिस्किस (कनाडा) कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जी7 शिखर सम्मेलन में उपस्थिति न केवल भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रमाण है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की शक्ति, प्रौद्योगिकी और नेतृत्व क्षमता को भी दर्शाता है। उन्होंने इस अवसर को भारत और कनाडा के बीच रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया।
कार्नी ने कनाडा में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। सम्मेलन के समापन पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कार्नी ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की जी7 में भागीदारी एक स्वाभाविक और सुसंगत निर्णय है। वे 2018 से हर जी7 बैठक में हिस्सा ले रहे हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था की गतिशीलता, उसके आकार और वैश्विक मंचों पर नेतृत्व की भूमिका को दर्शाता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि जी7 की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की मेजबानी करना उनके लिए सम्मान की बात है। कार्नी ने उम्मीद जताई कि मोदी अगले साल भी जी7 सम्मेलन में भाग लेंगे।
भारत-कनाडा संबंधों में नया मोड़
प्रधानमंत्री कार्नी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक को “महत्वपूर्ण” बताते हुए कार्नी ने कहा कि दोनों देश फिर से राजनयिक स्तर पर जुड़ाव बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। इस बैठक में यह सहमति बनी कि दोनों देश अपने-अपने उच्चायुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
यह उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भारत और कनाडा के संबंधों में गंभीर तनाव उत्पन्न हो गया था जब कनाडा ने भारत पर खालिस्तान समर्थक अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में संलिप्त होने का आरोप लगाया था। इसके बाद भारत ने कनाडा से अपने उच्चायुक्त और पांच अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया था और कनाडा के कई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया गया था।
भारत ने उस समय कनाडा की तत्कालीन सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पर यह आरोप लगाया था कि वे कनाडा में खालिस्तान समर्थक तत्वों को पनाह दे रहे हैं और उन्हें देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की अनुमति दे रहे हैं।
राजनीतिक परिवर्तन के साथ उम्मीदों की नई किरण
ट्रूडो के सत्ता से बाहर होने और कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत ने संकेत दिए थे कि वह कनाडा के साथ अपने संबंधों को बेहतर करने के लिए तैयार है। कार्नी की ओर से इस दिशा में पहल को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
जी7 शिखर सम्मेलन में मोदी की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब न केवल वैश्विक मंचों पर एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है, बल्कि वह अपने कूटनीतिक संबंधों को भी पुनर्निर्मित करने की दिशा में गंभीर है।
भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय वार्ता और राजनयिक संबंधों की बहाली की दिशा में यह कदम दोनों देशों के लिए सहयोग, व्यापार और वैश्विक हितों की दिशा में एक सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।