Govardhan Puja Auspicious Time Date And Importance: प्रकाश के पांच दिवसीय पावन पर्व की शुरुआत कल यानि मंगलवार को धनतेरस के साथ हो जाएगी। धनतेरस नरक चतुर्दशी के एक दिन पहले मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी के बाद बड़ी दिवाली मनाई जाएगी। बड़ी दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इस गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा के रूप में भी जाना जाता है।
यह दिन इंद्रदेव पर भगवान कृष्ण की विजय के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ अवसर पर लोग अपने-अपने घरों में गोबर और साबुत अनाज से कृष्ण भगवान और गोवर्धन पर्वत को बनाते हैं और उनकी पूजा करते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार प्रतिपदा तिथि का आरंभ एक नवंबर को शाम के 6:16 से हो रही है जबकि, इसका समापन 2 नवंबर को रात के 8:21 मिनट पर हो रहा है। हिंदू धर्म में प्रत्येक व्रत-त्योहार को उदया तिथि के साथ मनाया जाता है, इसलिए इस बार गोवर्धन पूजा 2 नवंबर के दिन की जाएगी। पूजा करने का शुभ मुहूर्त 2 नवंबर की शाम के समय 6:30 से शुरू होकर 8:45 तक रहेगा। इस समय पूजा करना शुभ होगा।
गोवर्धन पूजा की विधि
गोवर्धन पूजा के दिन गोबर से गोवर्धन महाराज की आकृति बनाई जाती है। गोवर्धन महाराज की आकृति के पास ही ब्रजवासी और पशुओं की आकृति भी बनाई जाती है। इसके बाद सबसे पहले देसी घी का दीपक गोवर्धन महाराज के सामने जलाया जाता है। ये दिन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है, इसलिए भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की जाती है और उनके आगे छप्पन भोग लगाए जाते हैं। उनसे सुख समृद्धि पशुधन में वृद्धि की कामना की जाती है।
गोवर्धन पूजा का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक महीने की प्रतिपदा तिथि के दिन ही ब्रजवासी इंद्रदेव की पूजा किया करते थे। हालांकि, भगवान कृष्ण ने लोगों को इंद्रदेव की पूजा करने के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा। इसके बाद ब्रजवासी गोवर्धन पर्वत की पूजा करने चले गए। इससे नाराज होकर इंद्रदेव ने भयंकर वर्षा शुरू कर दी। इसके बाद पूरे ब्रज में हाहाकार मच गया।
गोवर्धन पूजन का शुभ मुहूर्त
गोवर्धन पूजा का पर्व 2 नवंबर को मनाया जाएगा और इस दिन गोवर्धन पूजा का मुहूर्त शाम 6 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 45 मिनट तक है। गोवर्धन पूजा के लिए आपको 2 घंटा 45 मिनट का समय मिलेगा।