Samajwadi Party Leader Azam Khan: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और दिग्गज नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ने वाली है। रामपुर की एमपी एमएल कोर्ट ने डूंगरपुर मामले में आजम खान को दोषी ठहराया है और मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया। गुरुवार को कोर्ट इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगा।
सीतापुर जेल में बंद सपा नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। सपा नेता पर साल 2016 में डूंगरपुर जिले में गरीबों और किसानों के घरों को तोड़ने और कब्जाने का आरोप है। सपा सरकार में 2016 में डूंगरपुर बस्ती में रह रहे लोगों के मकान तोड़कर आसरा आवास बनाए गए थे। साल 2019 में बेघर 12 लोगों ने गंज कोतवाली में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई।
आरोप था कि सपा सरकार में मंत्री आजम खां के इशारे पर पुलिस और सपाइयों ने उनके घरों को जबरन खाली कराया था। उनका सामान लूट लिया और मकानों पर ध्वस्त कर दिया था। इन मुकदमों में पहले आजम खां नामजद नहीं थे। बाद में आजम खान को नामजद करते हुए यह प्राथमिकी दर्ज कराई। अब कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए दोषी ठहराया।
न्यायालय ने आजम खां को धारा 452, 392, 504, 506 और 120 बी में दोष सिद्ध किया है, जबकि धारा 307 में दोष मुक्त किया है। इसके अतिरिक्त बरकत अली ठेकेदार को धारा 452, 392, 504 और 506 में दोष सिद्ध किया है, जबकि धारा 447, 307 और 411 में दोष मुक्त किया है। आजम खां सीतापुर जेल में हैं, जेल से ही वीडियो कांफ्रेंस से पेशी हुई।
सपा सरकार में नहीं हुई सुनवाई
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीमा राणा के अनुसार, गुरुवार को फैसला लंच बाद आ सकता है। यह मुकदमा अबरार हुसैन की ओर से कराया गया था। उनका कहना था कि 6 दिसंबर 2016 को सुबह आठ बजे पूर्व सीओ सिटी आले हसन खां, दारोगा फिरोज खां, बरकत अली ठेकेदार, सीएंडडीएस के अभियंता परवेज आलम घर में घुस आए थे।
जान से मारने की नीयत से उनके ऊपर तमंचे से फायर किया गया। वह जान बचाकर भाग गए थे। इसके बाद उनके घर में जेवर नकदी आदि लूट ली गई। उनके घर को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया था। बाद में वहां पर आसरा आवास बनाए गए थे। तत्कालीन सरकार में कोई सुनवाई नहीं हुई। वह लगातार प्रशासन के चक्कर काटते रहे और गुहार लगाते रहे लेकिन, कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।