Karnataka: भारत में रहने वाले लाखों जैन समुदाय के लोग भौतिक सुख त्यागकर जैन भिक्षु बन रहे हैं। वह दीक्षा लेने के बाद नंगे पैर चलते है, अपने खाने में सिर्फ वह खाते हैं, जो उन्हें भिक्षा में मिलता है। वह आधुनिक तकनीक और एसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स का उपयोग नहीं करते हैं। हाल ही में एक बड़े कारोबारी की पत्नी और 11 साल के बेटे ने भौतिक सुख त्याग दिया है। वह दीक्षा लेने के बाद जैन भिक्षु बन गए।
महिला के पति मनीष कर्नाटक में बिजनेसमैन हैं। उनके साथ उनका 11 साल का बेटा हृदन भी भिक्षु बना है। दीक्षा लेने के बाद इन्हें नए नाम मिले महिला स्वीटी को भावशुधी रेखा श्री जी और बेटे को हितैषी रतनविजय जी नाम मिला है। वह अब जैन भिक्षु का जीवन बीता रहे हैं।
एक अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक, इनके एक रिश्तेदार विवेक ने बताया कि भावशुद्धि रेखा श्री जी जब गर्भवती थीं, तभी उन्होंने भिक्षु बनने का फैसला लिया था। उन्होंने तब ये भी सोच लिया था कि उनका बच्चा उनके ही नक्शे कदम पर चलेगा और जैन भिक्षु बनेगा।
उनके बेटे का पालन-पोषण इस समझ के साथ हुआ कि वो मठवासी वाले जीवन में प्रवेश करेगा। भावशुद्धि रेखा श्री जी के संकल्प को सुनकर उनके पति मनीष ने इसका समर्थन किया। विवेक ने बताया कि मनीष और परिवार के अन्य लोग ‘खुश हैं और उन पर गर्व करते हैं। मां-बेटे का दीक्षा समारोह जनवरी 2024 में गुजरात के सूरत में बहुत धूमधाम से हुआ था। दोनों अब सूरत में भी रहते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर मां-बेटे का एक वीडियो भी शेयर किया गया है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को काफी पसंद किया जा रहा है। लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया देकर भावुक होते नजर आए। एक यूजर ने लिखा कि यह जैन धर्म की खूबसूरती है। जैन धर्म में पैसा का कोई मोह नहीं होता। हम भगवान महावीर के बताए रास्ते पर चलते हैं।
इससे पहले गुजरात के एक अमीर जैन दंपत्ति ने भिक्षु बनने के लिए लगभग 200 करोड़ रुपए की संपत्ति त्याग दी थी। भावेश भंडारी और उनकी पत्नी ने भिक्षु का जीवन जीने के लिए फरवरी में एक औपचारिक समारोह आयोजित किया था। इस कपल का एक बेटा और एक बेटी है, जिन्होंने 2022 में दीक्षा ली थी।
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