Delhi: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सदन में नोट के बदले वोट या भाषण देने पर चलेगा केस

Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों और विधायकों से सदन में भाषण देने के मामले में बड़ा फैसला पलटा है। सर्वोच्च न्यायालय ने सदन में भाषण देने या वोट के लिए रिश्वत लेने के लिए मुकदमे से छूट के मामले में 7 जजों की संविधान पीठ ने पिछला फैसला पलट दिया है। बेंच ने कहा कि विशेषाधिकार के तहत केस से छूट नहीं दी जा सकती है।

सीजेआई (CJI) ने कहा कि हम पीवी नरसिम्हा के उस फैसले से सहमत नहीं है, जिसमें सांसदों और विधायकों को सदन में भाषण देने या वोट के लिए रिश्वत लेने के लिए मुकदमे से छूट दी गई थी। साल 1998 में 5 जजों की संविधान पीठ ने 3:2 के बहुमत से तय किया था कि ऐसे मामलों में जनप्रतिनिधियों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। आज सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को चुनौती देते हुए पलट दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर में सुनवाई के दौरान कहा था कि रिश्वतखोरी किसी मुकदमे से छूट का समाधान नहीं है। संसदीय विशेषाधिकार का मतलब किसी सांसद या विधायक को कानून से ऊपर रखना नहीं है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संसद में अपमानजनक बयानबाजी को अपराध मानने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

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बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट के सामने एक प्रस्ताव में कहा गया था कि संसद और विधानसभाओं में अपमानजनक बयान सहित हर तरह के काम को कानून से छूट नहीं मिलनी चाहिए जिससे ऐसा करने वालों के खिलाफ आपराधिक साजिश के तहत एक्शन लिया जा सके।

दरअसल, सीता सोरेन पर 2012 में राज्यसभा चुनाव के लिए वोट देने के बदले रिश्वत लेने का आरोप है। सीता सोरेन ने अपने बचाव में तर्क दिया था कि उन्हें सदन में ‘कुछ भी कहने या वोट देने’ के लिए संविधान के अनुच्छेद 194(2) के तहत छूट हासिल है।

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