Uttarakhand UCC Bill: मंगलवार को उत्तराखंड विधानसभा बजट सत्र में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को पेश कर दिया। आज से इस बिल पर बहस शुरू हो रही है। इस बीच प्रदेश में इस विधेयक का विरोध शुरू हो गया है। देहरादून में जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद ने यूसीसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किय़ा।
जमीयत-उलेमा-ए-हिंद का कहना है कि शरीयत के बाहर उन्हें कोई कानून मंजूर नहीं है। इस बिल में आदिवासियों को छूट दी गई और मुस्लिमों को इस विधेयक में रखा गया है। संविधान में मिले धार्मिक स्वतंत्रता के आधार पर अल्पसंख्यकों को भी इस कानून के दायरे से अलग रखा जाना चाहिए।
जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने एक बयान में कहा, “हम ऐसे किसी भी कानून को स्वीकार नहीं करेंगे जो शरीयत के खिलाफ हो क्योंकि एक मुसलमान हर चीज से समझौता कर सकता है, लेकिन वह शरीयत और मजहब पर कभी समझौता नहीं कर सकता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मुस्लिमों को टारगेट किया जा रहा है और बीजेपी धर्म के आधार पर राजनीति कर रही है। समान नागरिक संहिता विधेयक में अनुसूचित जनजातियों को इस प्रस्तावित कानून से छूट दी गई है। मुसलमानों को इस विधेयक के दायरे में रखा है।
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मदनी ने इस विधेयक को लेकर सवाल उठाया कि अगर संविधान की एक धारा के तहत अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, तो नागरिकों के मौलिक अधिकारों को मान्यता देते हुए संविधान की धारा 25 और 26 के तहत मुसलमानों को धार्मिक स्वतंत्रता क्यों नहीं दी जा सकती है।
मदनी ने दावा किया कि संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी है; लेकिन समान नागरिक संहिता मौलिक अधिकारों को निरस्त करती है। यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच अंतर पैदा करता है। लोकतंत्र में ऐसा कोई कानून मंजूर नहीं किया जा सकता हम देशभर में इस विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
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