Varanshi Gyanvapi: अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद काशी के सांस्कृतिक उदभव की शुरुआत हो गई। बीते बुधवार की रात इसकी साक्षी बनी, ज्ञानवापी परिसर के व्यास तहखाने में पारंपरिक पद्धति के साथ मूर्तियों की स्थापना की गई, इसके बाद यहां पूजा अर्चना शुरू हो गई।
हाल ही में हुए ASI के सर्वे में यह स्पष्ट हो गया था कि ज्ञानवापी की मस्जिद एक पुराने भव्य हिंदू मंदिर के ढांचे पर बनाई गई है। जिसमें हिंदू मंदिर संस्कृति के कई चिह्न दीवारों और खंभों पर अंकित मिले थे। मस्जिद की पश्चिमी दीवार मंदिर के खंभों पर खड़ी की गई है।
इसको लेकर मुस्लिम पक्ष का कहना था कि वह इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। हम जिला कोर्ट के इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। ज्ञानवापी मस्जिद परिसर कई शताब्दी से बना है। हिन्दू पक्ष ने व्यास तहखाने में पूजा अर्चना का अधिकार मिलने के बाद कोर्ट में ज्ञानवापी के वजूखाने और तहखाने के सर्वे के लिए एक याचिका लगाई है।
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राम नाम का रखा गया पत्थर
बता दें कि, वाराणसी की जिला कोर्ट ने व्यास खाने में पूजा की इजाजत दी थी, इसके बाद बुधवार को अष्ट देवताओं की मूर्तियां और राम नाम का पत्थर रखकर पूजा की गई। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन शंकर ने गुरुवार को इस बाबत कहा कि, यह हमारे मुख्य लक्ष्य की ओर एक कदम है। मैं प्रशासन को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने आदेश का पालन किया।
उन्होंने कहा कि, कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने कोर्ट के आदेश का पालन किया और इसके बाद पूजा पाठ शुरू कर दिया गया। बेरकेडिंग करके गेट बना दिया गया है। वहां जो देवी-देवता पहले स्थापित थे, उन्हें वहां विराजमान करके उनकी पूजा शुरू कर दी गई है।
जल्दी ही हिन्दू पक्ष की याचिका वजूखाने और तहखाने के सर्वे को लेकर कोर्ट सुनवाई करेगा। हिन्दू पक्ष के वकील ने दावा किया कि वजूखाने में बड़ा शिवलिंग मौजूद है। कोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) एक बार फिर से ज्ञानवापी में सर्वे करेगी।
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