संतोष कुमार सिंह
Millets Festival: दिल्ली में मिलेट्स महोत्सव में बोलते हुए उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि अन्न ही औषधि है। साल 2023 को संयुक्त राष्ट्र ने मिलेट्स वर्ष घोषित किया है। जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रात्रि भोज में मिलेट्स से बने भोजन प्रावधान रखा था। आज 130 देशों में मिलेट्स पर आयोजन किया जा रहा है।
अन्न ही है औषधि- उपराज्यपाल
राजधानी दिल्ली में गांधी दर्शन में तीन दिवसीय मिलेट्स महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव के उद्घाटन के बाद उपराज्यपाल ने जनसमूह को संबोधित किया। कहा कि मिलेट्स ही औषधि है। पूरी दुनिया आज मिलेट्स पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है। जी-20 में हम इसका महत्व देख चुके हैं कि कितना है। प्रधानमंत्री ने मिलेट्स से बने भोजन का प्रावधान रखा था।
बता दें कि, गांधी मेगा मिलेट्स फेस्टिवल का आयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और गांधी दर्शन के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है। तीन दिवसीय इस आयोजन का थीम “पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवन के लिए मिलेट्स के उपयोग” विषय पर आधारित है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में यूपी के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही शामिल हुए।
130 देशों में हो रहा आयोजन- सूर्यप्रताप शाही
अपने संबोधन में कृषि मंत्री ने कहा कि आज 130 देशों में मिलेट्स पर आयोजन हो रहा है। गीता में भी इसके बारे में लिखा गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 हज़ार किसानों को मोटे अनाज के नि:शुल्क बीज का वितरण किया है। मिलेट्स में इतनी ताकत है कि इसके सेवन से 100 वर्षों तक जीने की कल्पना की गई है।
इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित मिलेट्स मैन डॉक्टर खादर वली ने अपने संबोधन में कहा कि अगर आप चावल और गेहूं खाते हैं तो आप हिंसक हैं। एक किलो चावल के लिए 8,000 लीटर पानी की जरूरत होती है। जबकि एक किलो मोटे अनाज के लिए अधिकतम केवल 800 लीटर पानी की जरूरत होती है। हम प्रकृति के विरुद्ध चल रहे हैं। खाने का व्यवसायीकरण हो चुका है।
35 मिलेट्स उत्पादकों द्वारा लगाए गए स्टॉल
कार्यक्रम में देशभर से आए 35 मिलेट्स उत्पादकों द्वारा स्टाल भी लगाए गए हैं। इसके अलावा यहां रोजाना शाम को 6 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जा रहा है। आज पहले दिन के सत्र में इंडस्ट्रीयल फूड, दूसरे सत्र में ग्लूकोज असंतुलन, तीसरे सत्र में बाजरा क्यों धान और गेहूं क्यों नहीं, चौथे सत्र में बाजरे के साथ खाना बनाते समय जानने योग्य बातों पर चर्चा की गई।
दूसरे दिन 6 नवंबर को पांचवें सत्र में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी पारंपरिक प्रथाओं का पुनरुद्धार, छठवें सत्र में रिफाइन ऑयल कैंसर का कारक, सातवें सत्र में अंबाली (माइक्रोबियल संतुलन), आठवें सत्र में दूध (हार्मोनल बैलेंस), नौवें सत्र में मिलेट्स के साथ स्वादिष्ट भोजन बनाना, दसवें सत्र में संरचित जल, गुड़, मिठाई, अंतिम दिन 7 नवंबर को ग्यारहवें सत्र में बाजरा क्या हैं, बारहवें सत्र में पर्यावरणीय पहलू मिट्टी, नदी और वायु संरक्षण, तेरहवें सत्र में जैव विविधता और ग्लोबल वार्मिंग, चौदहवें सत्र में खाद्य संप्रभुता और पंद्रहवे सत्र में बाजरा के माध्यम से ग्राम स्वराज आदि विषयों पर चर्चा की जाएगी। अंतिम दिन समापन सत्र के दौरान हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रसाद शुक्ल और भारत सरकार के पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला द्वारा संबोधन और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया जाएगा।