संतोष कुमार सिंह
सहरसा: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जदयू अध्यक्ष ललन सिंह आज पूर्व सांसद आनंद मोहन के गांव पंचगछिया पहुंचे जहां उन्होने पचगछिया स्थित भगवती प्रांगण में स्वतंत्रता सेनानी स्व. रामबहादुर सिंह और उनके बड़े बेटे स्वतंत्रता सेनानी स्व. पद्मानंद सिंह ब्रह्मचारी की प्रतिमा का अनावरण किया।
प्रतिमा के अनावरण के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने आनंद मोहन से अपनी दोस्ती का भी जिक्र किया। मुझे आज खुशी हुई कि इन्होंने इस अवसर पर बुला लिया। स्व. रामबहादुर सिंह और स्व. पद्मानंद सिंह को अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं। आनंद मोहन जी एक बार महिषी से विधायक हुए और दो बार शिवहर लोकसभा के सांसद भी रहे। राम बहादुर बाबू तो 1919 में स्वामी सहजानंद सरस्वती के संपर्क में आए और जेल भी गए।
और बापू के असहयोग आंदोलन को सफल बनाने के लिए तत्पर रहे। नीतीश कुमार ने कहा कि “आनंद मोहन जी के कहने पर यहां आया हूं। पहले हमारी दोस्ती कैसी थी आपको मालूम है। उन्होंने कहा कि आपको कोई दिक्कत नहीं है हम तो समर्थक हैं आपके..आपको जो इच्छा है कीजिए। आपको जो भी राजनीति करनी है कीजिए। हमारा रिश्ता तो दूसरा है हम उसे निभाएंगे।सभी को एकजुट कीजिए।”
इस दौरान अपने संबोधन में पूर्व सांसद आनंद मोहन ने सबसे पहले नीतीश बाबू और ललन सिंह जिंदाबाद का नारा लगवाया। अपनी रिहाई के मुख्यमंत्री का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि मेरी रिहाई के लिए जनता ने पूजा, आंदोलन, धरना दिया.. मुख्यमंत्री ने आपके भाई आनंद मोहन को कानून में तब्दीली कर आपके सामने खड़ा कर दिया। जिसने आपके भाई के लिए कानून में तब्दीली कर आपके सिपाही आपके भाई को निकाला, आप उसके साथ खड़ा रहिएगा। आज आपके बीच खड़ा हूं तो मुझे कहने में कोई गुरेज नहीं है कि मैं मुख्यमंत्री जी के कारण खड़ा हूं।
उल्लेखनीय है कि आनंद मोहन की रिहाई के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने 10 अप्रैल को बिहार जेल मैनुअल 2012 में बदलाव किया था। इस बदलाव के बाद आनंद मोहन की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया था। इसके बाद 27 अप्रैल को आनंद मोहन को सहरसा जेल से रिहा कर दिया गया।