Himachal Pradesh: ज्वाली में डेढ़ किमी के दायरे में खिसक रहा पहाड़, अब तक एक दर्जन घरों का अस्तित्व किया खत्म

ज्वाली: इस साल का मॉनसून हिमाचल प्रदेश के लिए बड़ी आफत साबित हुआ है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण लैंडस्लाइड हुआ जिससे सैकड़ों की संख्या में लोगों की मौत हुई है। कई हजार लोगों का घर तबाह हो गया। अभी भी इससे राहत मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। आज भी मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य में 22 से 24 अगस्त तक बारिश का अलर्ट जारी किया है।इस बीच एक बड़ी तबाही सामने आ रही है जो अब तक एक दर्जन घर तबाह कर चुकी है और आगे कितने घर तबाह करेगी, इसका अंदाजा भी लगा पाना मुश्किल है।

दरअसल, ज्वाली विधानसभा के अंतर्गत आती न्यांगल पंचायत में एक से डेढ़ किलोमीटर के दायरे में पूरा पहाड़ ही खिसक रहा है। यह पहाड़ धीरे-धीरे पूरे गांव को तबाह करता हुआ आगे बढ़ रहा है। अब तक इस पहाड़ ने 12 घरों का अस्तित्व मिटा चुका है। वहीं लगातार मैदानी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा यह पहाड़ अभी कितने घरों को यह अपने आगोश में लेगा इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

तबाही के इस मंजर को देख लोगों के रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं। वहीं अपनी मेहनत से खड़े किए अपने घर को इस कदर पहाड़ की चपेट में आता देख प्रभावित लोग प्रकृति और कुदरत से रहम की भीख मांग रहे हैं। बता दें कि मौके पर शासन-प्रशासन भी पहुंच रहे हैं, लेकिन प्रकृति के तांडव के सामने उनका कोई भी हथियार काम करता नजर नहीं आ रहा है। इस तबाही में अपना सब कुछ गंवा चुके प्रभावितों का कहना है कि सरकार उन्हें कहीं अलग स्थान पर जमीन मुहैया कराए और उनके आशियाने बनाने में आर्थिक मदद करे।

मामले में एसडीएम ज्वाली महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जो घर गिर चुके है और जो भूस्खलन की चपेट में आने की कगार में है उनको खाली करवा दिया गया है और इनके रहने खाने की व्यवस्था सरकारी स्कूल में की गई है। गौरतलब है कि ऐसा ही मामला 10 साल पहले आया था जब अक्टूबर के महीने में पहाड़ खिसकना शुरु हो गया था। हालांकि उस दौरान ना तो बरसात का मौसम था और ना ही बारिश हुई थी।

उस दौरान भी कई घर पहाड़ के नीचे अपना अस्तित्व खो दिए। कई लोग बेघर हो गए। दस साल तक ऐसी कोई घटना नहीं देखने के बाद लोगों ने इस बात की चिंता खत्म कर दी कि अब शायद ही ऐसी कोई घटना घटेगी, लेकिन एक बार फिर ऐसी तबाही ने लोगों की जिंदगी में दस्तक दे दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *