शुभम रावत-
वाराणसी:ज्ञानवापी परिसर में ASI सर्वे जारी है। इस बीचमुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के वकील ने कहा है कि सर्वे के दौरान मस्जिद में दिख रहा त्रिशूल का चिन्ह वास्तव में त्रिशूल का चिन्ह नहीं है बल्कि अल्लाह लिखा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शनिवार से ज्ञानवापी परिसर में ASI का सर्वे शुरू हो चुका है।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने सर्वे के दौरान एक बड़ा दावा किया गया था। कहा गया कि सर्वे के दौरान तहखाने से मूर्तियों के अवशेष मिले हैं।
त्रिशूल का चिन्ह नहीं बल्कि अल्लाह…
वहीं ज्ञानवापी मस्जिद के ASI सर्वे के आज 5वे दिन एक और बड़ा दावा किया गया।मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के वकील ने सर्वे के दौरान एक बड़ा दावा पेश किया।उन्होंने कहा कि सर्वे के दौरान मस्जिद में दिख रहा त्रिशूल का चिन्ह वास्तव में त्रिशूल का चिन्ह नहीं है बल्कि अल्लाह लिखा हुआ है।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ नेअंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की याचिका को खारिज करते हुए ASI सर्वे को हरी झंडी दिखाई थी। जिसके बादएएसआई के पहले दिन के सर्वे में 7 घंटे से ज्यादा समय तक परिसर की आकृति तैयार की गई। इस दौरान मूर्तियों के अवशेष मिलने की बात सामने आई।
वहीं अबअंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के वकील अखलाक अहमद ने बड़े दावे किए हैं।उन्होंने कहा कि मुगलकालीन सिक्कों पर भी स्वास्तिक और ओम की आकृति उकेरी जाती थी। इसलिए यह कह देना कि कमल का फूल सिर्फ मंदिरों पर ही बना हुआ मिलेगा, गलत है। फूल तो कोई भी बना सकता है. उसका मंदिर या इस्लाम से कोई मतलब नहीं है।